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करियर के लिए जरूरी आत्मविश्वास

करियर के लिए जरूरी आत्मविश्वास

 
 

प्रस्तुति: बबीता कुमारी

अच्छे से अच्छा करियर हर व्यक्ति का सपना होता है और इसके लिए वह भरसक कोशिश करता है। इसके लिए वह घर छोड़कर दूसरी जगह जाने में भी नहीं हिचकता। करियर के नाम पर छोटे शहरों के विघार्थियों का बड़े शहरों की आ॓र रूख करना आज सामान्य सी बात है। लेकिन एक बड़ा सवाल यह है कि दिल्ली जैसे महानगरों में आकर क्या ऐसे हर विघार्थी के सपने साकार हो पाते हैं? सच यह है कि कई सफल होते हैं तो कई निराश होकर वापस जाने के लिए मजबूर हो जाते हैं या कई अपने करियर का मुकाम पाने के लिए संघर्ष करते ही रह जाते हैं।
छोटे शहरों से मेट्रो सिटी में आने वाले छात्रों के बारे में निर्भर यह करता है कि वे क्या सोचकर यहां आते हैं अर्थात वे अपने करियर के बारे में किस तरह की गाइडेंस हासिल कर पाते हैं। और उसके अनुसार कितनी तैयारी करते हैं, क्योंकि सफलता इसी चीज पर निर्भर करती है कि आप कितने योग्य व्यक्ति के निर्देशन में करियर निर्माण की दिशा में अग्रसर हैं। जो विघार्थी ठीक तरह से गाइडेंस नहीं ले पाते, वे अपने रास्ते से भटक जाते हैं और अंतत: थक-हारकर वापस लौटने को मजबूर हो जाते हैं।
रायबरेली से नोएडा की किसी कंपनी में काम करने वाली अदिति खुबेले का मानना है कि घर से दूर रहने में किसी भी छात्र या नया-नया करियर शुरू करने वाले को कुछ परेशानी तो जरूर होती है, लेकिन इसका सकारात्मक पहलू यह है कि वह आत्मनिर्भर हो जाता है। अदिति कहती है, ‘जिस मकसद से मैं यहां आई थी, वह तो अभी हासिल तो नहीं हो पाया है, परंतु कुछ तो ‘गेन’ कर ही रही हूं, जिससे आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी।’ पौड़ी गढ़वाल से दिल्ली आकर नौकरी करने वाली सीमा रावत का कहना है कि ‘एक ही जगह पर रहकर आप उस ऊंचाई पर नहीं जा सकते। इसलिए आपको घर से बाहर तो जाना ही पड़ेगा। मैं भी घर से बाहर निकलकर ही अपना करियर बनाने में सफल हुई हूं। मोनिका दीक्षित भी अपना घर (लखनऊ) छोड़कर दिल्ली में करियर तलाशने आई हैं। इनका कहना है कि ‘जितना हम सोचते हैं, उतना नहीं हो पाता, तो मन में निराश होता है। हालांकि मैं सफलता के काफी करीब पहुंच चुकी हूं, परंतु कभी-कभी मन में कुछ निराशा के भाव आ ही जाते हैं।’ इसी तरह की राय धनबाद से नोएडा स्थित एक नामी कंपनी के सेल्स डिपार्टमेंट में काम करने वाले सुषनोए सेन की भी है। परंतु नोएडा स्थित ‘ई-एक्सल’ बीपीआ॓ में काम करने वाली शैला शमीम की राय कुछ अलग है। शमीम का मानना है कि ‘निराशा के जिम्मेदार भी कहीं न कहीं हम स्वयं होते हैं। अत: इसके लिए जरूरत है स्वयं का मूल्यांकन करने की।’
इस विषय में मनोचिकित्सक संजय बंसल का कहना है कि छोटे शहरों से जब छात्र यहां आते हैं, तो वे भी यहां की जीवन-शैली के अनुसार जीना चाहते हैं, जबकि उस समय उनके पास आवश्यक योग्यता, पैसा और अंग्रेजी में बातचीत करने का अभाव होता है। इसलिए वे अपने को इनफीरियर फील करते हैं और यहां के वातावरण के अनुसार एडजेस्ट नहीं हो पाते हैं। ऐसे में स्वाभाविक तौर पर मन में निराशा आती है। इसके अतिरिक्त यदि किसी भी क्षेत्र में जब एक से अधिक बार असफलता मिलती है, तो निराश होना सामान्य सी बात है। निराशा की यह स्थिति डिप्रेशन का कारण बन सकती है, जो कभी-कभी एक बीमारी का रूप भी ले लेती है। जो परिस्थितिवश कारणों से होती है। लेकिन यदि हम इन कारणों को बदलने की कोशिश करें, तो यह ठीक हो सकता है। हां, यदि कोशिशों के बावजूद डिप्रेशन से निजात न मिल रही हो तो डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। इसके पीछे हमारे समाज की कुछ भ्रांतियां भी हैं। यहां पढ़े-लिखे व्यक्ति भी डिप्रेशन को बीमारी नहीं मानते। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति उचित इलाज कराने के बजाए नींद की दवाई लेना पसंद करते हैं, जो स्वास्थ्य और करियर दोनों ही लिहाज से बहुत घातक साबित होता है।
इन सारी स्थितियों के मद्देनजर इस बात पर विचार किया जाना जरूरी है कि जब हम करियर बनाने के लिए घर से निकलकर बड़े शहरों की रूख करते हैं, तो हमें स्थान और विषय का चुनाव बहुत ही सोच-समझकर करना चाहिए। भेड़चाल अपनाते हुए बाहर नहीं निकल जाना चाहिए। यही नहीं, बार-बार करियर बदलने से भी अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए सबसे पहले असफलता के कारणों का बारीकी से अध्ययन करना चाहिए। भरसक प्रयास के बावजूद यदि सफलता नहीं मिलती, तो फिर उस क्षेत्र बदलने के बारे में सोचना चाहिए। किसी भी क्षेत्र में करियर बनाने के लिए अपने में मौजूद आवश्यक योग्यता का आकलन कर लेना बहुत जरूरी है। साथ ही किसी योग्य व्यक्ति से निर्देशन प्राप्त करना सफलता के करीब ले जाता है। मैट्रो सिटी दिल्ली में करियर बना चुके या बनाने आए अधिकतर छात्रों का यही कहना है कि उन्हें सफलता मिली है या मिल रही है, हालांकि शुरूआती दिनों में कुछ समस्याओं का सामना अवश्य करना पड़ता है। लेकिन कुछ ऐसे भी छात्र हैं, जिन्हें काफी संघर्ष के बावजूद अभी तक सफलता नहीं मिल पायी है। ऐसे छात्रों के लिए यही सुझाव दिया जा सकता है कि वे अपना आत्मविश्वास बनाए रखते हुए प्रयास जारी रखें।
Sahara Samay

 

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