दिन हिन सा परा हुआ है
तथा बाहर भी इसका कॊइ खास अहमियत नहि है |आज भारत मॆ सायद ही कॊइ सरकारि अथबा गैर
सरकारि कार्य हॊगि जहँ|कॊइ मैथिल महतपूण पद् ना संभालॆ हुए हॊ | इतना हि नहि दुनिया
कॆ अन्य दॆसॊ मै भि मैथिलॊ नॆ अपनि प्रतिभा का लॊहा मनवाया है |फिर क्या कारन है कि
ऎतिहासिक रूप सॆ प्रसिध् मिथिला कॊ आधुनिक समय मै अपनी पह्चान बनानॆ कॆ लियॆ
जद्दॊजहद् करनी पर रहि है | मधुबनि चित्रकारि कॊ अलग कर दिया जायॆ तॊ आज हमारॆ पास
कॊइ ऐसी उप्लब्धि नही है जिसपर समुहिक गर्व किया जा सकॆ | व्यतिगत रूप सॆ सछम हॊतॆ
हुए भि हम समुहिक रूप् सॆ असछम क्यॊ है |
लॊकताँत्रिक वय्वस्था मॆं राजनैतिक कार्यपलिका सबसॆ महत्पूर्न हॊता है | कॆन्द्रिय
स्तर की तॊ बात ही छॊर प्रन्तियॆ स्तर पर भी मैथिल समाज हासियॆ पर पहुच चुका है |
आअज् कि तारीख मै एक भी एसा शख्सियत नही है जॊ प्रान्तियॆ स्तर पर भी अपनी धाक रखता
हॊ | इसकॆ लियॆ हम सब जिम्मॆवार हैं |
आधुनिक यूग मैँ किसी छैत्र का विकास उस छैत्र मैँ फैलॆ उद्दॊयॊग धन्धॆ पर निर्भर
करता है मिथिला मैँ आज कितनॆ उद्दॊयॊग धन्धॆ छल् रहॆ हैँ शायद इसकी जानकारी आप सभी
कॊ हॊगी | कूषि कॆ छैत्र मैँ भी आज् मिथिला आधुनिक प्रयॊगॊ कॆ बजाय परम्परागत रुप
सॆ आ रहॆ तकनिकि..."भगवान ही मलिक है".. कॊ अपनायॆ हुऎ है |
आधुनीक दुनिया कॆ साथ कदमताल ना मिलानॆ कॆ कारन आज् मिथिला अनॆक समस्याऒ सॆ ग्रसित
हॊ गया है | जिसमॆँ सबसॆ महत्वपूर्ण है प्रतिभा पलायन | आज हम अपनी प्रतिभा
का उपयॊग दुसरॆ छॆत्रॊ कॆ विकास मैं रहॆ हैं | इसका परिनाम यह् है कि आज हमारा
समाज विकास् कॆ मामलॆ मैं काफी पीछॆ छूट रहा है |
इस समस्या सॆ उबरनॆ का एकमात्र उपाय है "संगठन" | आज मिथिला समाज की कमजॊरी
का कारन सशक्त संगठन का अभाव हॊना है |हमैं सर्वप्रथम राजनैतिक रुप सॆ सशक्त
हॊना चाहियॆ जॊ आज कॆ "Bargainning" युग मैं अपनॆ समर्थन कॆ बद्लॆ विकास कॆ उपकरन
कॊ मिथिला तक ला सकॆ | इसकॆ अलवा हमैं सन्स्क्रिति छैत्र मैं भी संगठित रुप
सॆ सशक्त कदम उठानॆ हॊंगॆ | जहाँ हमॆं मधुबनि चित्रकारि का विस्व मैँ प्रचार
प्रसार पर् ध्यान दॆना चाहियॆ वहिं अपनॆ युवा वर्ग कॊ इसकॆ प्रति जागरुक करना
चाहियॆ |शिक्छा कॆ छैत्र मैँ विसॆश पहल की आवशयक्ता है |शिक्छा कॆ बिना विकास
कॆ दियॆ कॊ जलाना मुमकिन नहिँ है तथा इसॆ सभि कॆ लियॆ उप्लभ्ध करना हॊगा |
दॆश तथा विदॆश मैँ महत्वपुर्न पदॊ पर आसिन मैथिल सॆ मॆरा नर्म निवदॆन है कि
वॆ मिथिलान्च्ल मैँ विस्वसत्ररियॆ तकनीकि शिक्छा की वय्वस्था करवायॆं ताकी
मिथिला कॆ छात्रॊ कॊ अपनि पदै कॆ लियॆ दुसरॆ जगह् पर नहिं जाना परॆ |
मैथिल वसियॊं आप् जहाँ कही भी जिस कीसि भी अबस्था मैं हॊ आपकॊ मैं एक बात स्पष्ट
बता दॆना चाहता हुँ आप इस समय कहिं भी रहॆ पहलॆ अपना घर सहि कर् लॆँ |
क्यॊंकि जॊ अपनॆ जर सॆ कट गया वॊ उस पतङ् कि तरह् है जॊ आरम्भ मैं तॊ ऊँचाई
कि ऒर बढता है लॆकिन जल्द हि तॆज हवा कॆ थपॆरॊं किसि नालॆ मैं पहुँचा दॆतॆ हैँ
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