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आज स्वतंत्रता दिवस है। हमारा राष्ट्रीय त्योहार। 1947 में
पंद्रह अगस्त की सुबह शंखनाद के साथ आजाद हुआ था हमारा देश। इस दिन हम न
केवल राष्ट्र ध्वज फहराते हैं, बल्कि राष्ट्रगान गाते हैं और राष्ट्रगीत भी
गुनगुनाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारा राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत
कैसे बना? चलिए हम आपको इनकी शुरुआत के बारे में बताते हैं।
राष्ट्रगान जन-गण-मन हमारा राष्ट्रगान है। इस गीत की रचना नोबेल पुरस्कार विजेता रबींद्रनाथ टैगोर ने मूल रूप से बांग्ला भाषा में की थी। इस गान को लिखने के पीछे भी एक कहानी है। दरअसल, टैगोर ने जन-गण-मन की रचना के बारे में अपने मित्र पुलिन बिहारी सेन को एक पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने अपने मित्र को बताया-ब्रिटिश सरकार में उनका एक मित्र ऊंचे पद पर कार्यरत है। उसने मुझसे यह अनुरोध किया है कि ब्रिटेन के सम्राट के सम्मान में एक गीत तैयार किया जाए। रबींद्रनाथ कवि होने के साथ-साथ सच्चे देशभक्त भी थे। उन्होंने सोचा कि क्यों न एक ऐसा गीत तैयार किया जाए, जिससे अंग्रेजों को यह अहसास हो सके कि भारत का भाग्यविधाता जॉर्ज-पंचम, जॉर्ज-सप्तम या कोई अन्य ब्रिटिश राजा नहीं हो सकते। हालांकि बाद में यह विवाद भी हुआ कि टैगोर ने यह गीत अंग्रेजों के सम्मान में लिखा था। दरअसल, आजादी के लडाई के दौरान यह महसूस किया जाने लगा कि कोई ऐसा गीत होना चाहिए, जो सेनानियों में नया जोश भर दे। इसके लिए 27 दिसम्बर, 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में पहली बार जन-गण-मन को गाया गया। इसके बाद, स्वतंत्रता संग्राम के प्रत्येक आयोजन में इस गीत की गूंज सुनाई देने लगी। 15 अगस्त, 1947 की मध्य रात्रि को ऐतिहासिक संविधान सभा में भी यह गीत गाया गया था। 24 जनवरी, 1950 को जन-गण-मन के हिंदी संस्करण को राष्ट्रगान के रूप में संविधान सभा की मान्यता मिल गई। पूरे गीत के 5 छंदों (स्टैंजा) में से मात्र एक छंद को ही राष्ट्रगान के रूप में गाया जाता है। इसके गायन की अवधि लगभग 52 सेकॅन्ड है। कुछ अवसरों पर इसे संक्षिप्त रूप से गाया जाता है, जिसमें इसकी प्रथम और अंतिम पंक्तियां (गाने का समय करीब 20 सेकॅन्ड) होती हैं। वर्तमान में विभिन्न राष्ट्रीय समारोहों के आयोजन पर राष्ट्रगान की जो धुन बजाई जाती है, उसे राम सिंह ठाकुर ने तैयार की है। क्या आप जानते हैं कि वर्ष 2005 में राष्ट्रगान से सिंध शब्द को हटाकर कश्मीर शब्द जोडने की बात चल रही थी। इसके पीछे वजह यह बताई जा रही थी कि सिंध प्रांत अब पाकिस्तान का हिस्सा है। लेकिन कई लोगों के विचार में सिंध शब्द सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में कहा गया है, जो भारत के अतीत में गौरवशाली सभ्यता का प्रतीक है। इस तरह राष्ट्रगान में सिंध शब्द मौजूद रह गया। राष्ट्रगीत वंदेमातरम् हमारे देश का राष्ट्रगीत है। इसकी रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। इस गीत को बांग्ला तथा संस्कृत भाषा में तैयार किया गया था। दरअसल, बंकिमचंद्र ने बांग्ला भाषा में लिखे गए अपने उपन्यास आनन्द मठ में इस गीत को लिखा था। वास्तव में अंग्रेजी सरकार के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन में तेजी लाने के लिए वंदेमातरम् गीत की रचना की गई। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रबींद्रनाथ टैगोर ने पहली बार वंदेमातरम् गाया था। कांग्रेस अधिवेशन में गाने के बाद इस गीत का इतना प्रभाव पडा कि लाखों लोग आजादी की लडाई में कूद पडे। इससे बौखलाकर अंग्रेजों ने इस गीत पर प्रतिबंध लगा दिया था। पांच वर्ष के बाद 1901 में दखिना चरण सेन तथा 1905 में सरला देवी ने क्रमश: कलकत्ता तथा बनारस में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में यह गीत गाया। इसका अंग्रेजी में अनुवाद अरविंदो घोष ने किया था। क्या आप जानते हैं कि 1907 में जर्मनी में पहली बार भारत के झंडे को तैयार किया गया था। उस झंडे के मध्य में भी वंदेमातरम् लिखा हुआ था। दरअसल, वंदेमातरम् गीत में प्रत्यक्ष रूप में देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना की गई है, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का संदेश दिया गया है। बंकिम चंद्र ने दुर्गा के दस हाथों में एक अविभाजित बंगाल को भी दर्शाया है। लेकिन रबींद्रनाथ टैगोर ने इस संबंध में कहा था कि भारत में एक खास समुदाय इस गीत के रूप में दस हाथों वाली देवी की पूजा नहीं कर सकता है। इसलिए यह गीत अखंड भारत का गीत नहीं बन सकता है। इसलिए बाद में जन-गण-मन को राष्ट्रगान तथा वंदेमातरम् को राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया। सारे जहां से अच्छा लोकप्रिय देशभक्ति गीतों में से एक सारे जहां से अच्छा को भी माना जाता है। यह गीत कवि मोहम्मद इकबाल ने बच्चों के लिए लिखा था। यह गीत 1904 में इत्तेहाद पत्रिका में उर्दू भाषा में लिखी गई थी। इस गीत ने भी ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाने में नवयुवकों में एक नया जोश भरने में मदद की। यह भी जानें राष्ट्रीय झंडा : केसरिया, उजला और हरे रंगों से बना तिरंगा,जिसमें बीच (उजली पट्टी) में 24 तीलियों वाला एक चक्र है राष्ट्रीय पशु : बाघ राष्ट्रीय पक्षी : नर मोर राष्ट्रीय फूल : कमल राष्ट्रीय वृक्ष : बरगद राष्ट्रीय फल : आम 2003 में बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने दुनिया के दस लोकप्रिय गीतों के चुनाव के लिए लोगों में सर्वे किया। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि पूरी दुनिया के लगभग 7 हजार गीतों का चुनाव किया गया। बीबीसी के अनुसार, लगभग 155 देशों के लागों ने टॉप टेन में वंदमातरम का दूसरे स्थान पर चुनाव किया। अपनी राय भॆजॆं | संपादक कॊ पत्र लिखॆं | मित्र कॊ बतायॆं
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