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कहां
हैं श्रीराम?
jagran --
08/18/2008 04:54 PM
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इलाहाबाद, रतिभानत्रिपाठी। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान की
श्रीराम को कोई भारतीय खोजे तो अचरज की बात नहीं है, लेकिन कोई अंग्रेज इस पर
जिज्ञासु हो कि राम कौन थे, कहां जन्में, क्या-क्या किया और दुनिया भर के अनेक
देशों में करोडों की संख्या में भक्त क्यों हैं, तो जरूर हैरानी होगी। ऐसा ही
एक अंग्रेज इन दिनों भारत में तमाम जगहों की यात्रा करता घूम रहा है।
लंदन के रहने वाले मार्टिन बकलेश्रीराम पर शोध कार्य कर रहे हैं। उनकी राम की
तलाश अभी खत्म नहीं हुई। श्रृंगवेरपुर,चित्रकूट, वाल्मीकि आश्रम, तुलसी दास के
जन्म स्थान होते हुए इन दिनों वह इलाहाबाद में हैं। मार्टिन को राम को तलाशने
की लत तब लगी जब 1982में पहली बार वह भारत आए। उनके पिता उन दिनों चेन्नई में
एक कंपनी में काम करते थे।
उन्होंने वाल्मीकि रामायण पढी, तो मन बना लिया कि वह श्रीराम पर शोध करेंगे। वह
सोचते रहे कि आखिर श्रीराम में ऐसी कौन सी शक्ति है जो दुनिया भर में उन्हें
पूज्य बनाए हुए है। मुंबई जाकर 1984से पत्रकारिता के जरिये लेखन की दुनिया में
प्रवेश करने वाले मार्टिन ने श्रीराम पर अनुसंधान का कार्य शुरू किया। इस
सिलसिले में वह पहले पहल श्रीलंका गए फिर तमिलनाडु में रामेश्वरमसमेत अनेक
स्थानों से कई रामायण इकट्ठी कीं। वह न केवल श्रीराम की भक्ति में लीन संतों से
मिले वरन पेरियारमूवमेंट से जुडे लोगों से भी मिले।
मार्टिन साफ तौर पर कहते हैं कि श्रीराम ने मर्यादा के जो दायरे बनाए वह दुनिया
के किसी भी सभ्य समाज में श्रेष्ठ सिद्धांत कहे जा सकते हैं। वह श्रीराम के बारे
में जानकारी एकत्र करने के लिए कई देशों का दौरा भी कर चुके हैं।
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