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संस्कृत श्लोकों के साथ खुलते हैं स्कूल के दरवाजे
Ians-- 07/20/2008 10:15 PM

नई दिल्ली, 20 जुलाई (आईएएनएस)। इस विद्यालय के दरवाजे प्रतिदिन संस्कृत के श्लोकों के साथ ही खुलते हैं। उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि श्लोकों का उच्चारण पूर्णत: शुद्ध है या नहीं। छात्रों के उत्साह में तिनका मात्र भी कमी नहीं है, जबकि वे भारतीय नहीं हैं।
ग्लोबल इंडियन इंटरनेशनल स्कूल' का आदर्श यही है, जो वैश्विक ज्ञान के साथ-साथ भारतीयों में उत्साह भी भरता है।

सिंगापुर आधारित गैर-लाभकारी संगठन 'ग्लोबल इंडियन फाउंडेशन' ने छह साल पहले 'ग्लोबल इंडियन इंटरनेशनल स्कूल' का पहला केंद्र खोला था, लेकिन आज यह अपना मजबूत नेटवर्क बना चुका है। सात देशों में अब तक इसने 15 स्कूल खोल लिए हैं, जिसमें 17,000 से ज्यादा छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

इस स्कूल में ज्यादातर भारतीय छात्र पढ़ते हैं, लेकिन 30 अन्य देशों के छात्र भी यहां शिक्षा लेने आते हैं। इसके चार स्कूल भारत में हैं और अन्य मलेशिया, जापान, वियतनाम, न्यूजीलैंड, थाइलैंड और सिंगापुर में भी हैं।

इन स्कूलों में विश्वस्तरीय शिक्षा दी जा रही है। छात्रों को व्यक्तिगत तौर पर यहां आत्मविश्वासी बनाया जा रहा है। हालांकि, इस दौरान भारतीयता को कभी भी खोने नहीं दिया गया। यही कारण है कि संस्कृत के ज्ञान को यहां जरूरी बना दिया गया है।

ग्लोबल इंडियन फाउंडेशन के अध्यक्ष अतुल तेमुरनिकर ने कहा कि हर एक छात्र को यहां संस्कृत बोलना आना जरूरी है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे भारतीय हैं या नहीं।

इन स्कूलों के सभी छात्रों के लिए महात्मा गांधी की किताबों से भरे पुस्तकालय 'महात्मा गांधी केंद्र' जाकर उनके मूल्यों और विचारों के बारे में गहराई से जानकारी लेना भी जरूरी है।

इन स्कूलों में इंटरनेशनल बैकालोउरिएट (आईबी) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल (सीबीएसई), दोनों ही पाठ्यक्रम से शिक्षा दी जाती है।

सातवीं कक्षा तक यहां सीबीएसई पाठ्यक्रम अनिवार्य है, लेकिन उसके बाद 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई के लिए छात्र अपनी पसंद के अनुसार सीबीएसई या फिर आईबी, किसी भी पाठ्यक्रम का चुनाव कर सकते हैं।

आश्चर्य की बात यह है कि ज्यादातर गैर-भारतीय छात्र इसके बाद भी 12वीं के लिए सीबीएसई पाठ्यक्रम का चुनाव ही करते हैं।

अगले दस वर्षो में फाउंडेशन का 100 अन्य स्कूल खोलने की योजना है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।



 

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