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नई दिल्ली। शहीद-ए-आजम भगत सिंह के कंधे से कंधा मिलाकर अंग्रेजों की ईट से ईट बजा देने वाले सुखदेव को सांर्ड्स की हत्या में शामिल न होने के बावजूद फांसी पर चढ़ा दिया गया था। 15 मई 1907 को पंजाब के लायलपुर [अब पाकिस्तान का फैसलाबाद] में जन्मे सुखदेव भी भगत सिंह की तरह ही बचपन से ही आजादी का सपना पाले हुए थे। वह सशस्त्र आंदोलन के जरिए अंग्रेजों के चंगुल से भारत मां को आजाद कराना चाहते थे। राजगुरु, सुखदेव और भगत सिंह से संबंधित घटनाओं पर शोध करने वाले जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर चमन लाल के अनुसार सांर्ड्स हत्याकांड में सुखदेव शामिल नहीं थे, लेकिन अंग्रेजों ने इसके बावजूद उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि अंग्रेज किसी भी कीमत पर राजगुरु, सुखदेव और भगत सिंह को खत्म कर देना चाहते थे। इन तीनों की फांसी को उन्होंने प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था। राजगुरु और भगत सिंह को सांर्ड्स हत्याकांड [लाहौर षड्यंत्र] मामले में फांसी दी गई थी और सुखदेव को सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के मामले में सजा-ए-मौत दी गई। चमन लाल ने बताया कि इन तीनों क्रांतिकारियों में गहरी दोस्ती थी। चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में जब काले कानून पब्लिक सेफ्टी और ट्रेड डिस्प्यूट बिल के विरोध में सेंट्रल असेंबली में बम फेंकने का फैसला लेने के लिए हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन [एचएसआरए] की पहली बैठक हुई तो उसमें सुखदेव शामिल नहीं थे। इस बैठक में भगत सिंह ने कहा कि बम वह फेंकेंगे, लेकिन आजाद ने उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी और कहा कि संगठन को अभी उनकी बहुत जरूरत है। दूसरी बैठक में जब सुखदेव शामिल हुए तो उन्होंने भगत सिंह को ताना दिया.. शायद तुम्हें जिंदगी जीने की ललक जाग उठी है, इसीलिए बम फेंकने नहीं जाना चाहते। इस पर भगत सिंह ने चंद्रशेखर आजाद से कहा कि बम वह ही फेंकेंगे और अपनी गिरफ्तारी भी देंगे। चमन लाल ने बताया कि अगले दिन जब सुखदेव संगठन की बैठक में आए तो उनकी आंखें सूजी हुई थी। उन्होंने बताया कि सुखदेव भगत सिंह को ताना देने के बाद रातभर रोते रहे और उन्हें लगने लगा कि गिरफ्तारी देने के बाद भगत सिंह की फांसी निश्चित है। भगत सिंह ने सुखदेव को सांत्वना दी और कहा कि वह अपने दिल में कोई मलाल न रखें। देश के लिए कुर्बानी की जरूरत है। सुखदेव और भगत सिंह के परिवार लायलपुर में पास-पास ही रहते थे। दोनों ही दोस्त लाहौर के नेशनल कालेज के छात्र थे। आजादी के लिए दोनों एक साथ लड़े और मातृभूमि के लिए एक साथ ही अपनी शहादत दे दी। सुखदेव और भगत सिंह दोनों का ही जन्म 1907 में हुआ।
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