दरभंगा। डीएमसीएच के अधिकांश विभागों में ऐसे भी
सीनियर चिकित्सकों की कमी है। मरीजों के इलाज का सारा दारोमदार पीजी छात्रों के उपर
ही होता है। प्रत्येक वर्ष यहां नामांकन लेने के बाद दर्जनों पीजी डीएमसीएच छोड़कर
अन्य संस्थानों में चले जाते है। वर्ष 2008 में भी 17 पीजी छात्र डीएमसीएच को छोड़कर
चले गये। जिसका परिणाम होता है कि काफी संख्या में सीटें खाली रह जाती है और समय
बीत जाने के कारण नीचे के रैंक वाले अन्य छात्रों का नामांकन भी नहीं हो पाता है।
साथ ही संस्थान को भी नुकसान होता है। इस संबंध में डीएमसी के प्राचार्य डा. एस.एन.
सिन्हा ने बताया कि यह एक गंभीर मसला है। दूसरे संस्थानों में जाने के लिए किसी
छात्र को रोका भी नहीं जा सकता है। डा. सिन्हा ने कहा कि 3 अप्रैल को पटना में
आयोजित बैठक में इस मामले को वे उठाने का प्रयास करेंगे। जानकारी के अनुसार इस वर्ष
मेडिकल कालेज से बीच में ही पढ़ाई छोड़कर जानेवाले पीजी छात्रों में स्त्री एवं
प्रसूति विभाग से डा. उपासना सिंह, डा. असीता श्रीवास्तव, शिशु रोग विभाग से डा.
दिलीप कुमार चौधरी, ईएनटी से डा. कुमार राजीव रंजन, डा. प्रेम प्रकाश, कुमारी श्वेता,
पैथोलाजी विभाग से डा. इन्द्रभूषण, डा. प्रीतिश प्रसाद, आई विभाग से डा. बागेश्वर
कुमार, डा. मनौअर सुपीया फैजी, एनेस्थेसिया से डा. कुमार सत्यकाम, मेडिसीन विभाग से
डा. उमेश कुमार सिंह व डा. शैलेश कुमार, फीजियोलाजी से डा. रूही यासमीन, सर्जरी
विभाग से डा. अजीत कुमार व डा. अभिषेक तथा एनाटोमी विभाग से डा. विभा कुमारी शामिल
है।