दरभंगा । पृथक मिथिला राज्य की मांग को लेकर
मिथिलांचलवासी 17 मार्च को संसद के समक्ष प्रदर्शन करेंगे। अखिल भारतीय मिथिला
राज्य संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में मिथिलांचल समेत
बंगाल, महाराष्ट्र, कोलकाता, हरियाणा, पंजाब व दिल्ली में बसे मैथिल भाग लेंगे।
1902 ई. में प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. ग्रियर्सन द्वारा प्रस्तुत मिथिला के नक्शा
को आधार मानते हुए अलग मिथिला राज्य के लिए लगातार प्रयासरत व संघर्ष समिति के
अध्यक्ष डा. बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने सोमवार को पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए कहा
कि उनके आंदोलन को तेलांगना राज्य निर्माण समिति, विदर्भ राज्य निर्माण समिति तथा
बुंदेलखंड राज्य निर्माण समिति के नेताओं का भी समर्थन प्राप्त है। श्री बैजू ने
अलग राज्य की आवश्यकता जताते हुए कहा कि आर्थिक, शैक्षिक, राजनीतिक व भाषाई विकास
बिना अलग हुए संभव नहीं है। साथ ही बिजली व बाढ़ की समस्या, उद्योग-धंधों की स्थापना
के लिए अलग राज्य की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से ही मिथिलांचल
के साथ विकास मामले में दोयम दर्जे का व्यवहार होता आया है। डा. बैजू ने कहा कि
मिथिला क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के अस्तित्व को समाप्त करने, गव्य विकास का कार्यालय
यहां से हटाने, मिथिला क्षेत्रीय विद्युत बोर्ड को समाप्त करने के पीछे पटना व
दिल्ली में बैठे कुछ नेताओं की मिथिलांचल विरोधी मानसिकता ही काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई में अपना सबकुछ लुटा देने वाले पं. रामनंदन मिश्र,
सूरज नारायण सिंह, लक्ष्मण झा, कर्पूरी ठाकुर व भोगेंद्र झा की मिथिला का अलग राज्य
बने विकास संभव नहीं है। डा. चौधरी ने हिंदीभाषियों के विरूद्ध बाल ठाकरे के बयान
को गैरजिम्मेदाराना ठहराते हुए कहा कि इससे देश की अखंडता पर खतरा उत्पन्न हो गया
है। साथ ही उन्होंने प्रसिद्ध अभिनेता शत्रुघ्न सिंहा द्वारा श्री ठाकरे के बयान का
समर्थन किये जाने को भी देशद्रोही प्रवृति करार दिया। उन्होंने कहा कि दोनों के ही
विरूद्ध कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।