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| मिथिलालाइव समाचार |
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महानगरॊ मॆ घर अपना हुआ सपना, लॊन कंपनी नॆ कर्जदारॊ कॊ मुसीबत मॆ ड़ाला | 11/03/2007 12:14:33 PM +0530 |
मुंबई । बैंको द्वारा दिये
जा रहे। अन्धाधुन्द भावासीय ॠणों में कई सुरक्षात्मक कदम उठाये है। इनके चलते
दोषी कर्जदारों पर लगाम कसने की संभावना के साथ सीधे साहे कर्जधारों को मुसीबत
का समाना करने की आशंका जानकारों व्यक्त की है। वित्त विशेषज्ञों का स्पष्ट
मानना है कि आम आदमी का घर बनाने का सपना अब कोसों दूर हो गया है। तमाम
राष्ट्रीकृत और निजी क्षेत्र के बैंको ने नियमों में परिवर्तन किये है। बैंक ऑफ
बडौदा ने कर्ज की पात्रता के बदले दायरे के अनुसार एक माह में एक लाख से ऊपर आय
वाले को कर्ज की पात्रता 60 से बढाकर 70 फीसदी कर दीं। दूसरी तरफ 20 हजार से कम
मासिक कमाने वाले को कर्ज भुगतान की दर 60 से घटाकर 50 फीसदी कर दी है। बैंक ऑफ
बडौदा के जनरल मैनेजर अजय कुमार मानते हैं कि मध्यम वर्षीय अपने अन्य खर्च
काटकर मासिक किश्त जमा करने में कठिनाई महसूस करता है। बैंक की मासिक किश्त
सुरक्षित करना चाहते है।
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