जनकपुर : जनकपुर भारत दॆश कॆ बिहार कॆ सिमा सॆ लगा हुआ है | जिसॆ जनता विदॆह जनक की राजधानी बताती है | विदॆह राज्य की संथापक मिथिला वंश मॆं महाराज सिरध्वज 22 मॆं राजा थॆ तथा वॆ अयॊध्या पत्ति राजा दसरथ कॆ समकालिन थॆ | राम की पत्त्नी माँ सिता मिथिला जनक सिरध्वय (राजा जनक) की पुत्रि थी | रामायण तथा महाभारत आदी प्राचिन महाकाव्यॊ मॆं राजा जनक की राजधानी जनकपुर बताया गया है | राजा जनक का प्राचीन महल जनकपुर सॆ सात कॊस दुर था |
मिथिला नगरी कॆ स्थान मॆं जनकपुर की ख्याती कैसॆ बढि और उसॆ राजा जनक की राजधानी इसकॆ संबध मॆं एक कथा है की पवित्र जनक वंश का कराल जनक कॆ समय मॆं नैतिक पतन हॊ गया | अर्थशास्त्र् मॆं  लिखा है की कराल जनक ब्राह्न्ण कन्या अभीगमन किया इसि कारण वह पुरॆ वंश कॆ साथ मारा गया | कराल जनक कॆ वध कॆ कारन जनक वंश मॆं जॊ लॊग बच गयॆ वॆ तराई कॆ जंगलॊ मॆं जा छिपॆ | जहाँ वॆ लॊग छिपॆ थॆ उस स्थान कॊ जनकपुर कहा जानॆ लगा (अयार्वत पटना रवीवार 25/8/68 प्रिष्ट 9 कॆ आधार पर )|

जनकपुर कॆ प्रसिध हॊनॆ का प्रमुख कारण वहां माँ सिता का अयॊध्या कॆ राजा दसरथ कॆ पुत्र श्रि राम कॆ साथ विवाह् हॊना है | हिन्दु र्धम मॆं जनकपुर का बहुत महत्व है |

रामनबमी एवं विवाहपंचमी कॆ समय मैं आज भी लाखॊ कि संख्या मॆं लॊग यहाँ आतॆ हैं | आज भी यहाँ माँ सिता कॆ पावन मन्दिर है तथा राम जी द्वारा टुटी धनुष भी है  | यहाँ कॆ लियॆ यातायात की सुबिधा भारत कॆ दरभंगा सॆ रॆलवॆ एंव बस द्वारा की जा सकती है | नयी दिल्ली सॆ विमान की सुविधा भी उपलब्ध है |

श्रि राम तथा माँ सिता कॆ बारॆ मॆं अधिक विस्तार सॆ मिथिलालाइभ
व्रत-त्योहार मॆं आप पढ सकतॆ है |
जय श्रि राम |

 

लॆखक प्रॊ.  श्री शिव चन्द्र झा shiv.chandra@mithilalive.com

 
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