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कहानी जिंदगी
के
श्री:जीतमोहन झा (जीतू
), mrjitmohan@gmail.com
मिथिलालाइव
Partner,http://maithilaurmithila.blogspot.com
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एक आदमी के घर एक सन्यासी मेहमान बैन कs
एल्खिंन राईत म गपशप के दरमियाँन ओ सन्यासी आदमी स कहाल्खिंन की आहा आई
ठाम इ छोट मोट खेती म की लागल छी ! साइबेरिया म किछ दिन पहिने हम यात्रा
पर रही, ओई ठाम जमीन एतेक सस्ता अछि मानू आहा कs मुफ्त म मिल जेत ! आहा
अपन इ जमींन बेच क साइबेरिया चैल जाओ ! ओहिठाम हजारो एकड़ जमीन मिल जेत
एतबे जमीन मs ! ओई ठाम के जमीन बड उपजाऊ छई, आर ओई ठाम के लोग एतेक सीधा
- साधा की करीब - करीब जमींन मुफ्ते मs दे देत ! ओई आदमी कs वासना जागलैन
! ओ दोसरे दिन अपन सब जमीन बेच क साइबेरिया चैल देलेथ ! जखन ओ साइबेरिया
पहुच्ला त सन्यासी के बात हुनका सच लगलैन ! ओ ओइठाम के आदमी स पुछलाखिन
की हम जमीन खर्दैलय चाहे छी ! त हुनका जबाब मिललैन, जमीन करिदै हेतु आहा
जतेक पाई लालो य ओकरा रैख दियो ; आर जीवन के हमरा लग खाली इये उपाय अछि
की जमीन बेच दी ! कैल भोर सूरज उगई पर आहा निक्लब आर साँझ सूरज डूबे तक
जतेक जमीन आहा घेर सकी घेर लेब ओ आहा के भे जेत !
बस चालैत रहब .........साँझ सूरज डूबे तक जतेक जमीन आहा घेर सकी घेर लेब
ओ आहा के भे जेत ! बस शर्त इ अछि की जते स आहा चलब सुरु करब साँझ सूरज
डूबे स पहिने आहा क ओहीठाम वापस आबे परत !
ओ आदमी राईत भैर सुइत नै सकला, सच पुछू त यदि हुनका जगह पर अहो राहतो त
ओहिना हेतीय; एहें क्षण मs कियो सुइत साकेत छैथ ? ओ आदमी राईत भैर योजना
बनाबेत रहला की कुन तरह स कतेक जमीन धेरल जाय ! सुबह होइते पूरा गाम के
लोग जमा भे गेल्खिंन जहिना सूरज उगलैन ओ आदमी चलब सुरु केलाह ! चले स
पहिने ओ रोटी आर पैन सब साथ म ले लेलेथ रहे ! रास्ता म भूख प्यास लागै पर
सोचने रहेथ चलते चलते भोजनों के लेता ! हुनकर खाली इये सोचाब रहेंन की
कुनू भी हालत म रुक्नै नै छई ! चलैत चलैत आब ओ दौरब सुरु के देल्खिंन
सोच्लेथ बेसी जमींन घेर लेब ! ओ दौरेत रहला सोचने रहेथ ठीक बारह बजे लौट
जेब, ताकि सूरज डूबैत - डूबैत वापस पहुच सकी ! बारह बैज गेलेंन, ओ मिलो
चैल चुक्लैथ रहे, मगर वासना के कुनू अंत छई ? ओ सोचे लगला बारह त बैज गेले
आब लौटबाक चाही ; लेकिन सामने बला जमीन बहुत उपजाऊ छई कनि ओकरो घेर ली !
लौटेत समय कनि तेजी स दौरे परत आर की एके दिन के त बात छई तेजी स दौर लेब
!
दौरे के चक्कर मs ओ भूख - प्यास सब के भूले देल्खिंन नै ओ किछ खेलैथ नै
पिलैथ बस दौरेत रहला ! रास्ता मs ओ रोटी पैन स फेक देलखिन ! बस लगातार
दौरेत रहला एक बैज गेलेंन मुदा हुनका लौटे के मन नै होइत रहेंन, कियेकी
आगा के जमीन आर सुन्दर - सुन्दर रहे ! मगर आब ओ लौटे के प्लान बनेलैथ; दु
बजे ओ लौट्ब सुरु केलाह ! हुनका डर सताबे लगलैन की लौट सकब की नै ! ओ अपन
सब ताकत वापस दौरे म लगे देलैथ ; लेकिन ताकत ख़त्म होई के करीब रहेंन !
सुबहे स दौरेत - दौरेत हंफा लगला, ओ घबराबे लगला की सूरज डूबे तक लौट सकब
की नै ! दुबारा अपन सम्पूर्ण ताकत दौरे म लगे देलेथ मुदा आब सुरजो डूबे
लगला .......! ज्यादा दूरियों आब नै बचलैन ग्रामीण सब क ओ देखा लगला ! सब
गाम के लोग हुनका आवाज़ पर आवाज़ दैत रहेंन सब हुनका उत्साहित करैत रहथिन
आइब जाओ ......आइब जाओ ओ आदमी सोचे लग्लैथ की अजीब आदमी आइठंम के छैथ ! ओ
अपन अंतिम दम लगे देलैथ इम्हर सूरज डूबैत छैथ आर ओम्हर ओ दौरेत छैथ !
सूरज डूबैत - डूबैत पाँच - सात गज पहिने ओ गिर परला तयो दम नै तोरलैथ आब
हुनका स उठल नै जय छैन, किछ दुरी बांकी देख ओ घिस्टैत - घिस्टैत पहुचे के
प्रयास करे लगला ! सूरज के आखरी किरण विलिप्त होई स पहिने हुनकर हाथ ओई
जमीन पर पैर गेलैन जते स ओ दौरब सुरु केलैथ रहे ! एक तरफ सूरज डूबल दोसर
तरफ हुनकर अंतिम साँस सेहो हुनकर साथ छोइर देल्कैंन ओ मैर गेला बहुत
मेहनत केलखिन रहे ! शायद ह्रदय के दौरा पैर गेलैन ! ओई ठाम जमा गाम के सब
सीधा - साधा कह्लाबे बला दौरे के चक्कर मs ओ भूख - प्यास सब के भूले
देल्खिंन नै ओ किछ खेलैथ नै पिलैथ बस दौरेत रहला ! रास्ता मs ओ रोटी पैन
स फेक देलखिन ! बस लगातार दौरेत रहला एक बैज गेलेंन मुदा हुनका लौटे के
मन नै होइत रहेंन, कियेकी आगा के जमीन आर सुन्दर - सुन्दर रहे ! मगर आब ओ
लौटे के प्लान बनेलैथ; दु बजे ओ लौट्ब सुरु केलाह ! हुनका डर सताबे लगलैन
की लौट सकब की नै ! ओ अपन सब ताकत वापस दौरे म लगे देलैथ ; लेकिन ताकत
ख़त्म होई के करीब रहेंन ! सुबहे स दौरेत - दौरेत हंफा लगला, ओ घबराबे
लगला की सूरज डूबे तक लौट सकब की नै ! दुबारा अपन सम्पूर्ण ताकत दौरे म
लगे देलेथ मुदा आब सुरजो डूबे लगला .......! ज्यादा दूरियों आब नै बचलैन
ग्रामीण सब क ओ देखा लगला ! सब गाम के लोग हुनका आवाज़ पर आवाज़ दैत
रहेंन सब हुनका उत्साहित करैत रहथिन आइब जाओ ......आइब जाओ ओ आदमी सोचे
लग्लैथ की अजीब आदमी आइठंम के छैथ ! ओ अपन अंतिम दम लगे देलैथ इम्हर सूरज
डूबैत छैथ आर ओम्हर ओ दौरेत छैथ ! सूरज डूबैत - डूबैत पाँच - सात गज पहिने
ओ गिर परला तयो दम नै तोरलैथ आब हुनका स उठल नै जय छैन, किछ दुरी बांकी
देख ओ घिस्टैत - घिस्टैत पहुचे के प्रयास करे लगला ! हंसेत - हंसेत आपस
मए बात करे लगला की अई तरह के पागल आदमी आबैते जैत रहैत छैथ ! इ कुनू नया
घटना थोड़े अछि ! अक्सर लोग खबर सुनला पर आबैत रहेथ आर अहिना मरैत रहेथ !
इ कुनू अपवाद नै नियन रहे ओई सब जमींदार के ! कियो ऐहेंन नै भेला की ओ
जमीन कए घेर क ओकर मालीक बनला ! इ (लघु कथा) खाली कहानी मात्र नै अछि ! इ
घटना हमर, आहा आर सम्पूर्ण संसार के कहानी छी हमर सब के जिन्दगी के कहानी
छी ! हुनके जेका आई हम सब के रहलो य ! हुनके जेका जमीन घेरे के पाछा दौर
रहलो य की कतेक जमीन घेर ली ! बारह बजे य, दोपहर होई य, लौटे तक के समय
भेला के बाबजूद कनि आर के चक्कर मए हम सब दौर रहल छी ! ओकरा पछा भूख
प्यास सब भूले दै छी ! सच पुछू तs हमरा आहा के पास जिवई हेतु समय नै अछि
! हमसब चाहत के पीछा भाईग रहलो य ! कहियो हमसब संतुस्ठ नै भे रहलो यs,
हुनके जेका हमर आहा के सोच अछि अहि सब चक्कर मए गरीब - आमिर सब भूखे मैर
रहलो यs कियो अपन जिन्दगी जी नै पबैत छैथ ! जीवे हेतु कनि विशान्ति चाही
! जीवे हेतु कनि समय चाही, जीवन मुफ्त मिले य बस ज्ञान हेनाय जरुरी अछि
!!
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