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अतुल्य-प्रकाश उर्फ बब्लू ...... 

भोर भेला पर हुनकर कनियाँ ऑफिस गेलीह। ऑफिस त’ बब्लूओ गेल छलाह मुदा हुनका आय काज करबा में कोनो मोन नहि लागैत छलन्हि। लन्च'क समय में हुनकर बाबूजी हुनकर कनियाँ के फोन केलथिन्ह। नहि जानि किएक एहि बेर हुनकर कनियाँ हुनकर फोन उठा लेने छलीह आ बाबूजी कें कहने छलथीन्ह, "गोर लागैत छी बाबू जी!" हुनकर बाबूजी कहलथिन्ह, "सौभाग्यवती रहथु, की हमरा एतेक अधिकार दैत छी जे हम अहाँ के दुई लाइन कही"। नहि जानि किएक ओ हुनका परमिशन द' देलथिन्ह।

हुनकर बाबूजी फोने पर कहय लागलथिन्ह, "कनियाँ! हमर बेटी! आय हमर उमर साठि पार क' रहल अछि। हमरा लेल जेना बब्लू तहिना अहुँ। हम आय ई बात अहाँ के एहि दुआरे कहि रहल छी किएक ते हमरा बुझल अछि जे अहाँ पढ़ल-लिखल छी आ हमर बात के अहाँ बहुत बढियाँ तरीका सँ बुझि सकैत छी। जँ अहाँ एतेक पढ़ल नहि रहितहुँ त’ हम अहाँ के अखन किन्नहुँ नहि फोन केने रहितहुँ"

ओ आगु बाजैत कहलथिन्ह, "बेटी, हमरा लोकनिक किछु सँस्कार अछि। जेना बिलाई म्याउँ म्याउँ करैत छैक कुकुर भौं भौं करैत छैक... किएक त’ ई ओकर सँस्कार छैक। आय यदि कोनो कुकुर म्याउँ म्याउँ करय लागय त’ ओकरा किओ वैल्यू नहि देतैक। तें कुकुरक भला एही में छैक जे ओ भौं भौं करय।"

हुनकर तर्क जारी छल, "तहिना हमरा लोकनिक सेहो सँस्कार अछि। मानि लिअ आय अहाँक बाबूजी आबि जाथि आ अहाँ हुनकर पैर नहि छुबि हुनका हाथ मिला कें स्वागत करिऔक तें की अहाँ अपन बाबूजी'क प्रतिष्ठा में कमी क' देबन्हि, मुदा हाथ मिला के अहाँ के मोन नहि मानत. जे आत्मा के सँतुष्टि पैर छुबि के भेटत ओ कहिओ हाथ मिलेला सँ नहि। किएक ते हाथ मिलेनाय अपना लोकनिक सँस्कार में नहि अछि। अपना लोकनिक सँस्कार में छैक जे पैर छुबि प्रणाम करी"।

ओ समाप्त करैत बजलाह, "तें बेटी अहाँ दुनु लोकनिक एखन जीवन'क शुरुआत थीक। बरसातिक पूजा एक सौभाग्यशाली, सम्पूर्ण आ खुशहाल दाम्पत्य जीवन'क लेल कयल जायत छैक। ई अपना लोकनिक सँस्कार में अछि आ हजारों साल सँ मान्यता छैक, जे बरसातिक पूजा मोन सँ करैत छैक ओकर परिवार हमेशा खुशहाली में बीतैत छैक। आ सबसँ पैघ जे जीवन में ई एक्के बेर होइत छैक। जीवन बहुत पैघ छैक आ अहाँ के ई त’ शुरुआते थीक, अहाँ के जीवन में कैरियर बनेबाक बहुत मौका भेटत। तें अहाँ एकरा नहि छोड़ब। हमर बात मानि लिअ आ काल्हि छुट्टी ल' के ई पूजा जरूर करू, एहि सँ हमेशा अहाँक परिवार खुश रहत"।

ई कहि हुनकर बाबूजी फोन काटि देलथिन्ह। हुनकर बाबूजी के भेलन्हि जे पुतोहु बात मानि जेथिन्ह मुदा कनियाँ के ऊपर में विपरीत प्रभाव पड़लन्हि। कनियाँ तुरन्त अतुल्य प्रकाश उर्फ बब्लू के फोन क’ कहलथिन्ह, " सम्भालो अपने बाबूजी को जो मन में आये आँय-बाँय बकते रहते हैं। उनको मालूम नहीं था क्या कि वह अपने बेटे की शादी एक सॉफ्टवेयर इन्जीनियर से कर रहे हैं, बताओ मुझको वह कुत्ता का भौं भौं और बिल्ली की म्याँउ म्याँउ से सँस्कार समझा रहे थे। उनको बोल दो की सँस्कार क्या होता है मुझे अच्छी तरह से मालूम है।"

"और मैं बेवकूफ नहीं हूँ। मेरा कल प्रोजेक्ट का डीलिवरी है इसीलिए, नहीं तो तुमलोगों को मैं इतना नाटक करने का मौका नहीं दिया होता यदि मैं छुट्टी माँगूगी तो मुझे नौकरी से निकाल दिया जाएगा। और एक हजार साल के रीति-रिवाज के लिए अपना नौकरी नहीं खोना चाहती।" हुनकर कनियाँ फ्रश्टेशन में अपन बात कहैत फोन काटि देलथिन्ह. मुदा बब्लू अपन बाबूजी के अपन कनियाँ के विचार नहि कहबा में नीक बुझलथिन्ह आ नियति'क इच्छा जानि एकरा बिसरि जेबाक सोचलथिन्ह। आब हुनको लागय लागलन्हि जे हुनकर कनियाँ ठीके त’ कहैत छथीन्ह।

आय साँझ में जँ हुनकर कनियाँ घर एलीह ते अतुल्य-प्रकाश उर्फ बब्लू सेहो हुनका कहय लागलन्हि जे अहाँ'क विचार सँ हमहुँ सहमत छी। जीवन बहुत पैघ छैक आ आय सँ पचास साल बाद कतेक लोक एहि परम्परा के आगु बढ़ेताह से पता नहि। पचास साल बाद किओ बरसाति मनेबो करताह की नहि से पता नहि। तें अपना लोकनि किएक एहि में फँसि अपन जीवन खराब करब। यदि अहाँ के छुट्टी नहि भेटैत अछि ते जाउ अहाँ काल्हि आफिस जाऊ। हम त’ पहिने सँ छुट्टी नेने छी काल्हि हम नहि जायब"।

हुनकर कनियाँ के हुनका ऊपर मेँ सहजे विश्वास नहि भेलन्हि। हुनका मोन में खटक’ लागलन्हि जे जरूर एहि में ई दुनु बाप-बेटाक किछु चालि अछि। हमेशा सँ सतर्क रहय लागलीह। मुदा अतुल्य-प्रकाश उर्फ बब्लू आब पूर्ण तरहें सहज भ' गेल छलाह्। आ नहि जानि किएक हुनकर सहजता हुनकर कनियाँक मोन में शंका नहि मुदा एक शाँति प्रदान करैत छलन्हि।

बब्लू आय़ जल्दी सुति गेलाह। मुदा सब किछु सामान्य भेलाक बादो हुनकर कनियाँक मोन उद्विग्न भेल छलन्हि। बेर-बेर हुनका मोन में बब्लूक बाबूजीक बात कौंध जायत छलन्हि, जे बरसाति नव दाम्पत्य जीवन कें खुशहाल करबाक एकटा पूजा थीक। लोक एक जीवन में एक्के बेर ई पूजा करैत अछि जाहि सँ हुनकर जीवन खुशीपूर्वक बीतय। ई बात एक पढ़ल लिखल लोक बेसी बुझि सकैत छैक. दोसर तरफ हुनका इहो मोन पड़ैत छलन्हि जे काल्हि प्रोजेक्टक डेलिवरी थीक। भोरे-भोर उठि के ऑफिस जेनाय अछि। बहुत काज निपटेनाय अछि। आ अमेरिका में भोर होमय सँ पहिने ओकरा डेलिवरी क' देबाक छन्हि। ओकर बाद हुनकर प्रोमोशन, अमेरिका जेबाक अवसर कत्तेक चीज भेटतन्हि। हुनकर दुनिएँ बदलि जायत।

आय बरसाति छल। बब्लू अखन धरि सुतल छलाह। आय ओ छुट्टी लेने छलाह। मुदा हुनकर कनियाँ भोरे उठि तैयार होमय लागलन्हि। हुनकर नौकरीक आय सबसँ महत्वपूर्ण दिन छल। हुनका आय ई साबित करबाक अवसर छलन्हि जे लड़का आ लड़की में कोनो अन्तर नहि बल्कि ओ लड़का सब सँ एक डेग आगुए छथि. ओ भोरे-भोर तैयारी करैत छलीह मुदा काल्हि बब्लू'क बाबूजी सँ फोन पर भेल बात हुनका कखनो-कखनो डरा जाइत छलन्हि, "जीवन, परिवार, खुशहाली, बरसाति इत्यादि-इत्यादि"। मुदा प्रत्येक आवेग पर अपना आप के सम्हारैत, ओ अपने आप सँ साबित करै लेल चाहैत छलीह जे ओ स्त्री थीकीह मुदा कमजोर नहि। स्त्री'क सबसँ पैघ दोस्त स्त्री आ सबसँ पैघ प्रतिद्वन्दी स्त्रीए. ई शब्द हुनका अपना लक्ष्य सँ नहि डगमगा सकैत छलन्हि। जखन ऑफिस जेबाक लेल ओ तैयार भ' गेलीह तखनो बब्लू निश्चिंत भ' सुतल छलाह, जेना किछो नहि भेल छल। मुदा कनियाँक आवाज जखन कान में गेलन्हि "चाय पी लो" त’ धरफड़ा के उठलाह।

 

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