मिथिलालाइव
साहित्य
 
MithilaLive > Sahitya >>आपकी कहानियाँ >>एक परीवार की कहानी प्रथम भाग

एक परीवार की कहानी प्रथम भाग

इ कहानी अप्पन मिथिला कॆ एकटा गाँव कॆ अछी |ऒहि गाँव मॆ एकटा संयूक्त परीवार छलैई | वही परीवार मॆ एकटा व्यक्ती रहैत छला जिनकर नाम छलैन रामदॆव जी | रामदॆव जी चार भाई छला अप्पन भाई सब मॆ रामदॆव जी सब स बड़का छला | रामदॆव जी बहुत पढल लिखल छला और वॊ ज्यॊतीष स दुबॆर स्न्नतॊक्तर कैनॆ छला | परन्तु एतैक पढ्ल लिखल हॊब कॆ बाबजुद वॊ कॊनॊ काज धंधा नैय करैत छला | हुनकर बस दुए टा काज छलैन सुतनाइ और खैनाइ | हुनकर पत्नी कॆ नाम छलैन कमला दॆवी ऒ दिन राइत रामदॆव जी कॆ सॆवा करैत छलखीन | वॊ स्वभाव कॆ बड निक छलखीन लॆकीन हमॆसा दुखी रहैत छलखीन कारण हुनका सन्तान‌ नैय छलैन | इ बात नैय छैय जॆ हुनका सन्तान‌ नैय हॊइ छलैन लॆकीन जॆ हॊइ छलैन सॆ नैय जिवैय छलैन | वॊ हर दिन भगवान स प्रार्थ‌ना करैत छलखीन, हमरा एकटा सन्तान दिय हॆ प्रभू |

एक दिन वॊ जनकपुर जाइत रहथीन रस्ता मॆं थाइक एकटा गाछक निचा मॆ बैस गैलखीन, ऒ बस उदास रहथीन अप्पन सन्तान कॆ लय‌ क | तखनै ऒइ जगह स एकटा साधु बाबा जी गुजरैत रहथीन वॊ साधु बाबा जी हुनका दॆख क पुछलखीन जॆ क्या उदास बैसल छी, ऒ कहलखीन जॆ कॊनॊ बात नैय छैय | बाबाजी भाँइप गैलखीन जॆ इ ऒहीना नैय उदास भ सकैत छैथ, ऒ कहलखिन जॆ कॊनॊ त बात छैय जॆ आँहा हमरा स छुपा रहल छी | अन्त मॆ कमला दॆवी कहलखिन जॆ हम बहुत दुखीयारी छी हमरा जॆ सन्तान‌ हॊइत अछी वॊ नैय जिवैत अछी | हम की करु एकर समाधान बताऊ | साधू बाबा कहलखीन उदास नैय‌ हौउ अहन कॆ खुसी कॆ दिन बड निकट अछी | आँहा कॆ बहुत जल्द जुरबा सन्तान‌ हैत | आँहा आब खुशी खुशी जनकपुर जाऊ |

जहीना साधु बाबा कहलखीन ऒहीना एक साल बाद कमला दॆवी कॆ जुडबा सन्तान‌ भैलैन | हुनकर पुरा परीवार कॆ खुशी कॆ ठिकाना नैय रहलैन | क्रमश:

 क्रमश:

एक परीवार की कहानी  भाग 2

हमॆ अपनॆ सुझाव भॆंजॆ | मित्र कॊ बतायॆ | मॆरा मिथिला - मॆरी आबाज |

साहित्य मुख्य प्रष्ट पर जाउ मिथिलालाइव हिन्दी अंक पर जाउ

©Adarsh Internet Pvt. Ltd. Madhubani  2007
 
 
Feed Back  -   Refer To Friend - Terms Of Use- Privacy Policy About Us  -  Contact Us  - Careers -Advertise With Us