|
एक परीवार की कहानी भाग
2 कमला दॆवी कॆ जुड़वा संतान हौव कॆ बाद त
हुनका सब कॆ खुशी कॆ ठिकाना नैय रहलैन |सब कॆ लड्डु बटाय लगलैय | ऒकर बाद
छठियाय क दिन दुनु बच्चा कॆ नाम राखल गैल, नाम रामदॆव जी अपनॆ रखलखीन बड़का कॆ
नाम रंजन मिश्रा और छॊटका कॆ नाम सुभास मिश्रा |
जॆना की आहाँ पहिल भाग मॆ पढनै रहियै की रामदॆव जी अपनॆ किछ कमाइ धमाइ नैय
करैत छलैथ | समय बितैत गैल आब दुनू बच्चा पाँच साल कॆ भ गैलैय | रामदॆव जी
दुनु बच्चा कॆ नाम स्कुल मॆ लिखा दैलखीन | किछ समय बाद छॊटका बॆटा सुभास जी
कॆ पढअ लिखअ मॆ मुन नैय लागैय छलैय लॆकीन बड़का बॆटा पढअ मॆ बड मुन लागैत छलैय
| रामदॆव जी जख्खन बुझलखीन जॆ आब सुबास कॆ पढ मॆ मुन नैय लागैत छैय त वॊ बढ
परॆसान भैला रामदॆव जी कॆ पढाइ लिखाइ स बढ प्रॆम छलैन | एक दिन रामदॆव जि
अप्पन छॊटका बॆटा सुभास जी कॆ घर स निकाइल दॆलखिन और कहलखिन जॆ जख्खन तॊरा
पदअ लिखअ मॆ मुन नैय लागैय छौअ त कलकत्ता चइल जॊ ऒतईय छोटका चच्चा लग रैही क
कमैयहैं |
लॆकीन बडका बॆटा कॆ पढाइ मॆ बढ मुन लागैय | पर रामदॆव जी कॆ लग मॆ ऒतॆक पैसा
नैइ रहैन | तख्खन रामदॆव जी अप्प्न बडका बॆटा कॆ अप्पन ससुर कॆ पास भॆज
दॆलखीन | रंजन कॆ आगा कॆ पढाइ ऒतैय यानी की अप्पन नानी कॆ गाँव नजिरपुर मॆ
भैलैन |
रामदॆव जी स छोटका भाइ घुरन जी नॆता गिरी करथिन तै लक हुनका सब नॆता जी कहैत
छलैन |
हुनकर काज रहैन क्करौ जमीन पर कब्जा कैनाइय और ककरौ नाम लिखा दॆनाइय | ऒ दिन
राइत एक दॊसर कॆ लड़ब मॆ लागल रहैत छलैथ | पर इअ सब काज रामदॆव जी बिल्कूल नैय
पसन्द छलैन | ऒ कैअ बॆर घुरन जि कॆ मना कॆलखीन पर ऒ नैय मानलखीन |
क्रमश:
एक परीवार की कहानी भाग 3
>>
हमॆ अपनॆ सुझाव भॆंजॆ |
मित्र कॊ बतायॆ
|
मॆरा मिथिला - मॆरी आबाज |
साहित्य
मुख्य प्रष्ट पर जाउ
|
मिथिलालाइव
हिन्दी अंक पर जाउ |