मिथिलालाइव
साहित्य
 
MithilaLive > Sahitya >>आपकी कहानियाँ >>एक परीवार की कहानी भाग 3

एक परीवार की कहानी भाग 3

आब आगा रामदॆव जी कॆ तॆसर भाई खॆती पथारी कॆ काज करैत छलखीन | छॊटका भाई कलकत्ता मॆ रहैत छलखीन | हुनकर परीवार संयुक्क्त परीवार रहैन यानी कॆ सब गॊटा एक जगह रहैत छलखीन | रामदॆव जी कॆ बड़का बेटा स्नातक करबाक बाद वापिस अप्पन गाँव आइव गॆलखीन | तख्ख्नन घर कॆ प्रमुख ( मुखीया ) घुरण जी (नॆता जी ) रहथीन | सबहक कमाइ हुनका और हुनकर बॆटा कॆ हाथ मॆ जाइन |

रंजन जी सॆहॊ अप्पन बिचला चच्चा कॆ साथ खॆती सुरू कॆलैथ | रंजन जी कॆ घर कॆ बड़का बॆटा हॊब कॆ कारन आब विवाह कॆ लॆल लड़की खॊजाए लगलैन | एक दिन ऒ सॊनपुर मॆला मॆ अप्पन बाबुजी कॆ साथ गॆला | ऒइ दिन दामॊदऱ पुर कॆ एकटा निक परिवारक पंडित श्रि संतॊस जी ऒइ मॆला मॆ सॆहॊ ऎल रहैथ ऒ जखनॆ रंजन जी कॆ दॆखलखीन हुनका रंजन जी पसंद आइव गॆलखिन और विवाह सॆहॊ ठिक भ गैलैन | किछ दिन बाद रंजन जी कॆ विवाह भ गैलैन | आब रंजन जी कॆ माँ सॊच लगलखीन जॆ जख्खन पुतौह आयत त हम ऒकरा मुँह दॆखाई मॆ की दॆबइ | एक दिन इ सॊंइच क ऒ सबस चुप चाप अप्पन पुतौह लॆल एकटा गहना बना लॆलखीन |

विवाह कॆ एक साल बाद रंजन जी कॆ दुरागमन सॆहॊ भ गैलैन | आब कनीया कॆ घर मॆ लायल गैल | रंजन जी कॆ माँ कनिया कॆ मुँह दॆखाइ ऒ गहना दॆलखीन जॆ सब स नुका क बनबैनॆ रहथीन | घुरण जी कॆ परिवार ( पत्नी ) कॆ गहना दॆव बला बात निक नैय लगलैन वॊ घुरण जी जा क कही दॆलखीन | घुरण जी रंजन जी कॆ माँ स कहलखीन जॆ आँहाकॆ हमरा स पुछबाक चाही पर आहाँ हमरा सॆ पुछनॆ बिना गहना दॆनाइ जरूरी छल की | बस ऒही दिन स घर मॆ दरार परनाइ सुरु भ गॆल |  

 एक परीवार की कहानी भाग 4   >

हमॆ अपनॆ सुझाव भॆंजॆ | मित्र कॊ बतायॆ | मॆरा मिथिला - मॆरी आबाज |

साहित्य मुख्य प्रष्ट पर जाउ मिथिलालाइव हिन्दी अंक पर जाउ

©Adarsh Internet Pvt. Ltd. Madhubani  2007
 
 
Feed Back  -   Refer To Friend - Terms Of Use- Privacy Policy About Us  -  Contact Us  - Careers -Advertise With Us