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बेगरता  -  सौजन्य: प्रवासी, हैदराबाद

हम – "हमरा हुनक मोबाइल नम्बर चाही छल।"
पापा – "की बात से?"
हम – "........"
पापा – "किछु पूछबा के छलौ की?"
हम – "हम्म...हाँ......नहि, पुछबा के त' किछु नहि छल। बस नम्बर लेबाक छल।"
पापा – "हमरा लग त' हुनक माँ के मोबाइल नम्बर अछि, जौं चाही त' एकरे लिखा दैत छियौक। ओना कि पुछय के छलौह तोरा?"
हम (घबराबैत) - "नहि, हमरा की पुछय के रहत, बस...ओनाही नम्बर रहय के चाही।"

तखने पापा के की फुरेलनि से नहि बुझी, लेकिन वो माँ के हाँक दैत कहलखिन जे "देखियौ त' राजीव की कहि रहल अछि" आ ओ मम्मी के फोन धरा क' चलि गेलखिन। हमरा बुझायल जे हमर धरायल गट्टा छुटल आ उसाँस भेल। आब मम्मी से ओतबे पैरवी के जरूरत छलय।

मम्मी – "कि भेलओ तोरा, कि पुछय छलही कनिया के विषय में पापा से?"
हम – "कहाँ किछ, खाली फोन नम्बर माँगने छलिएन हुनका से..."
मम्मी – "किनकर फोन नम्बर?"
हम – "हुनकर घरक फोन नम्बर तोरा बुझल छौ?"
मम्मी – "फोन नम्बर त' छहिए, लेकिन तोरा कोनो बात आ कि शंका...कि बात करय के छौ?"
हम (लजायत) - "बात की रहतय, ओ छोटका (भाई) कहय छलइ जे हुनका हमरा से गप्पक सेहनता, तैं पुछलियौ...जे कि करी हम। बात करी की नहि करी?"
मम्मी – "अरौ छौड़ा, अखन सिद्धाँतो नहि भेलए य' आ तों बात करय लेल धरफड़ायल छी"
हम – "नहि, ओ त' ओनाही कहलियौ...जे हुनकर मोन छैन्ह त'..."
मम्मी – "आ तोहर मोन कि कहैत छौ?"

एतबा बाजि मम्मी के हँसी लागि गेलय आ हमर खुशामद शुरु भ' गेल, जे हमरा बात करय दे हुनका सँ।

मम्मी – "तोरे कनिया छथुन्ह, पुछि के देखही, जे हुनका गप्प करय में आपत्ति नहि त' बात कर, एहि में पापा से कि पुछय छलही"

बुझायल जेना पिंजड़ा के कोनो तार टूटि गेल होय आ दिन भरि पिंजड़ा में भागय के सपना देखैत एम्हर से ओम्हर चक्कर काटय बला सुग्गा के खुजल आकाश में उड़य के रस्ता भेट गेल होय। उत्साह आ उत्तेजना में साँस तेज भ' गेल छल। दुपहरिया से साँझ इंतजार में आ इ दुविधा में कटल जे कोन समय बात केनाय उचित रहतय। कखनो होय जे अखने बात क' ली, फेर होय जे नहि राति में वो असगर रहती तखन बात करब। राति के इंतजार विकट बुझायल आ सांझ के राति बुझि फोन केलिएन। इ हुनक माँ के मोबाइल नम्बर छलैन्ह से आशा छल जे हुनक माँ उठेती हमर कॉल के। मोन में दस तरह के गणना करैत जे कि कहबय आ कि नहि आ कॉल केलौं। रिंगक आवाज सँगे दिलक धड़कन सेहो बढ़ि गेल। ओम्हर माँ जी के बदले ओ अपने फोन उठेलेथ। एम्हर हमर करेजा धकधकाएत जे कोना की कहिअए, आ ओम्हर हमर नाम ओ मोबाइल में पहिने से जोगि लेने छलखिन। से "चिड़ै के जान जाय, नेना के खिलौना" बला परि भ' गेल। हमर सभटा गणना फेल भ' गेल आ मुँह में बकार नहि। ओम्हर हुनको किछु बाजय में नहि बनलैन जे कि बाजी। बुझु जे कनेक देर ल' नेटवर्क गायब भ' गेल होय, मोबाइल के त' नहि पर हमरा सभक। एहि तंद्रा के तोड़ैत हम बाजलिएन- ........

 

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