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महात्मा गाँधी पर एक नजर (नागॆन्द्र झा "खॆलू भाई" )
khelubhai@mithilalive.com
मोहनदास करमचन्द गांधी (गुजराती: મોહનદાસ કરમચંદ ગાંધી, (2 अक्तूबर 1869 से 30
जनवरी 1948) जो महात्मा गांधी नाम से भी जाने जाते हैं, भारतीय स्वतन्त्रता
संग्राम के प्रमुख नेता थे। रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने सर्वप्रथम उन्हें महात्मा
बुलाया - महात्मा संस्कृत भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है महान आत्मा। भारत की
जनता उन्हें प्यार से बापू बुलाती है और उन्हें अर्वाचीन स्वतन्त्र भारत का
राष्ट्रपिता माना जाता है। नेताजी सुभाषचन्द्र बोस ने 1944 में सर्वप्रथम उन्हें
सर्वप्रथम राष्ट्रपिता बुलाया।
भारत स्वाधीनता संग्राम के अन्य कई महत्वपूर्ण नेताओ के समान उन्होने इंग्लैड
मे वकालत की शिक्षा प्राप्त की थी। महात्मा गांधी ने अंग्रेजो से भारत को
स्वतंत्र कराने के लिए उन्होने अहिंसक आंदोलनो की शुरूआत की, जिसे सत्याग्रह का
नाम दिया। विश्व के अन्य कई महत्वपूर्ण लोक-अधिकार आंदोलन सत्याग्रह से प्रेरित
हुए। सत्याग्रह का प्रयोग उन्होने सर्वप्रथम दक्षिण अफ्रिका मे अंग्रेजो के
अत्याचार के खिलाफ भारतीय समुदाय के आंदोलन मे किया था। दक्षिण अफ्रिका से भारत
वापस आने पर उन्होने गरीब किसानो और मजदुरों के साथ मिल कर अत्याचारपूर्ण भारी
कर और भेद-भाद के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया। महात्मा गांधी राष्ट्रीय
कांग्रेस के नेता बने और देशव्यापी महिला समानाधिकार, जातीय भेद-भाद विरोध,
छुआछूत विरोध जैसे सामाजिक आंदोलनो की शुरूआत की। सबसे महत्वपूर्ण उन्होने
स्वराज्य - भारत की स्वाधीनता की मांग, आंदोलन का नेतृत्व किया। उनके प्रमुख
आंदोलन 1930 मे नमक कर के खिलाफ सविनय अवज्ञा (दांडी नमक यात्रा), 1942 मे भारत
छोड़ो रहे है।
जीवन
गांधीजी का जन्म 2 अक्तूबर को गुजरात
के पोरबन्दर शहर में हुआ था। उनके पिता का नाम कर्मचन्द और माँ का नाम पुतलीबाई
था। उनके पिता 147 में पोरबंदर के दीवान थे। करमचंद गान्धी के तीन पुत्र एवं एक
पुत्री थी। लक्ष्मीदास (काला), कृष्ण्दास (करसनिया) और सबसे छोटे मोहनदास।
रलियत बेन मोहनदास से बडी थी। स्कूल की पढ़ाई समाप्त करन के बाद वे इंग्लैंड गये।
वहाँ जाने के पहले ही उनका विवाह कस्तूरबा से हो चुका था जो बाद में बा नाम से
पुकारी गयीं। बा पोरबंदर के व्यापारी गोकुलदास मकनजी की पुत्री थी। इंग्लैंड
में कानून पढ़ कर वे बैरिस्टर बने और भारत लौट कर वकालत करने लगे।
एक मित्र ने उन्हें मुकदमा लड़ने के लिये दक्षिण अफ़्रीका बुलाया । वहां रंगभेद
और उससे उत्पत्त अत्याचारों का उनके ऊपर गहरा असर पडा। उन्होंने वहां रंगभेद
नीति का विरोध किया। दक्षिण अफ़्रीका से वापस आने से पहले ही वो भारत में ख्याति
प्राप्त कर चुके थे।
सन 1915 मे भारत वापस आने पर उन्होंने अंग्रेज़ों के खिलाफ़ स्वतन्त्रता
संग्राम की धरोहर संभाल ली और देश की आज़ादी के लिये सत्याग्रह शुरू कर दिया।
उन्होंने स्वदेशी वस्तुओं का प्रचार किया और अंग्रेज़ी सरकार के गलत कानूनों को
तोड़ा। उनके नेतृत्व मे हुए आंदोलनों में दांडी कूच विख्यात है, जिसमें उन्होने
खुले आम अंग्रेज़ों के लगाये हुए नमक कर का उल्लंघन किया था। कुछ वर्षों बाद
उन्होंने "भारत छोड़ो" का नारा लगाया। उनके नेतृत्व मे भारत को 1947 में आज़ादी
मिली।
वे छुआछूत को गलत मानते थे। उन्होंने शूद्र एवं दलित व्यक्तियों को हरिजन नाम
दिया। आज भी भारत में छोटे वर्ग के लोगों को हरिजन के नाम से बुलाया जाता है।
महात्मा गांधी सब धर्मों को बराबर मानते थे। उनकी प्रिय धुन थी - रघुपति राघव
राजा राम पतित पावन सीता राम। ईश्वर अल्लाह तेरे नाम सबको सन्मति दे भगवान ॥
हत्या
30 जनवरी 1948 को प्रार्थना सभा में जाते
हुए गांधीजी पर रिवॉल्वर से गोली चलाकर नथूराम गोडसे ने उनकी हत्या की। 'हे राम'
कहते हुए महात्मा गांधी ने शरीर छोड़ा। गोडसे ने महात्मा गांधी को आज़ादी के
समय हुई कौमी वारदातों का ज़िम्मेदार ठहराते हुए उसको हत्या का कारण बताया था।
उनकी समाधि दिल्ली में राज घाट पर है जहां लोग अब भी उन्हें श्रद्धान्जलि देने
जाते हैं।
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