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हिन्दू
विवाह
(Shri Shiv Chandra Jha )
shiv.chandra@mithilalive.com
हिंदू धर्म में विवाह को सोलह संस्कारों में
से एक संस्कार माना गया है। पाणिग्रहण संस्कार को सामान्य रूप से हिंदू विवाह
के नाम से जाना जाता है। अन्य धर्मों में विवाह पति और पत्नी के बीच एक प्रकार
का करार होता है जिसे कि विशेष परिस्थितियों में तोड़ा भी जा सकता है परंतु
हिंदू विवाह पति और पत्नी के बीच जन्म-जन्मांतरों का सम्बंध होता है जिसे कि
किसी भी परिस्थिति में नहीं तोड़ा जा सकता। अग्नि के सात फेरे ले कर और ध्रुव
तारा को साक्षी मान कर दो तन, मन तथा आत्मा एक पवित्र बंधन में बंध जाते हैं।
हिंदू विवाह में पति और पत्नी के बीच शारीरिक संम्बंध से अधिक आत्मिक संम्बंध
होता है और इस संम्बंध को अत्यंत पवित्र माना गया है। विवाह के प्रकार :- 1. ब्रह्म विवाहः
दोनो पक्ष की सहमति से समान वर्ग के सुयोज्ञ वर से कन्या का विवाह निश्चित कर
देना 'ब्रह्म विवाह' कहलाता है। सामान्यतः इस विवाह के बाद कन्या को आभूषणयुक्त
करके विदा किया जाता है। आज का "Arranged Marriage" 'ब्रह्म विवाह' का ही रूप
है।
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