मिथिलालाइव
साहित्य
 
MithilaLive > साहित्य‌ >>लॆख >>
बजट: महँगाई और आम आदमी

भारत में संयुक्त प्रगतिशील गठबंध (यूपीए) सरकार का अगला बजट 'आम आदमी' पर केंद्रित हो सकता है.अभी सरकार की सबसे बड़ी चिंता बढ़ती महँगाई है. इसके संकेत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ख़ुद दे चुके हैं.

जब प्रधानमंत्री पिछले दिनो उद्योग और वाणिज्य संगठन फिक्की के सम्मेलन में पहुँचे तो उन्होंने महँगाई पर नियंत्रण को एक सामाजिक जवाबदेही क़रार दिया और कहा "ये सवाल किए जा रहे हैं कि सरकार आर्थिक विकास को ताक पर रख कर महँगाई पर अनावश्यक ध्यान दे रही है. लेकिन ये ध्यान रखना चाहिए कि महँगाई की मार सबसे ज़्यादा ग़रीबों पर पड़ती है."
उनके इस बयान के बाद शुक्रवार को जारी हुए आँकड़ों में महँगाई दर में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है.
आर्थिक पत्रकार सुरेंद्र सूद कहते हैं, "बजट में सरकार चाह कर भी कोई ऐसा फ़ैसला नहीं कर सकती जिससे महँगाई अचानक नीचे आ जाए. लेकिन कुछ क़दम उठाए जा सकते हैं, जैसे करों में कमी करना."

सरकारी कोष इस ओर इशारा भी कर रहे हैं. वर्ष 2007 में अप्रैल से दिसंबर के बीच कर संग्रह में लगभग 45 फ़ीसदी की वृद्धि हुई है, इसलिए वित्त मंत्री रोज़मर्रा की ज़रुरतों के सामानों पर उत्पाद कर कम कर सकते हैं.

क़ीमतें घटने की संभावना

दिल्ली विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफ़ेसर आलोक पुराणिक कहते हैं, "बजट में तेल, शैंपू, साबुन जैसे सामानों पर लगने वाले करों में कमी की जा सकती है."
साथ ही टेलीविज़न, कंप्यूटर, फ्रिज, कार आदि पर भी उत्पाद कर घटाया जा सकता है.
सरकारी कर्मियों के लिए गठित छठे वेतन आयोग को भी वित्त मंत्री मंज़ूर कर सकते हैं. हालाँकि इससे सरकारी खजाने पर लगभग 25 हज़ार करोड़ रूपए का बोझ पड़ सकता है

आलोक पुराणिक

महँगाई दर बढ़ने के पीछे बड़ा कारण पेट्रोल और डीजल के दामों में वृद्धि है. वामपंथी दलों की लंबे अरसे से माँग रही है कि पेट्रोलियम पदार्थों पर उत्पाद और सीमा शुल्क में कमी की जाए. इनके दाम बढ़ने से माल ढुलाई बढ़ जाता है जिससे सामान की कीमत भी बढ़ जाती है.

सुरेंद्र सूद कहते हैं, "हमें जिस कीमत पर प्रेट्रोल या डीजल मिलता है उस कीमत में लगभग आधा हिस्सा करों का होता है."

कर छूट

नौकरीपेशा वर्ग के लोगों को कर छूट की सीमा बढ़ा कर सरकार बड़ा तोहफ़ा दे सकती है.
रोज़गार गारंटी योजना का दायरा बढ़ने की उम्मीद की जा रही है आलोक पुराणिक कहते हैं, "आयकर छूट की न्यूनतम सीमा एक लाख दस हज़ार से बढ़ाकर डेढ़ लाख रूपए हो जाने की संभावना है. इसके अलावा बुनियादी संरचना मज़बूत करने के लिए बने फंडों में निवेश करने पर आयकर में छूट दी जा सकती है."

उनका कहना है, "सरकारी कर्मियों के लिए गठित छठे वेतन आयोग को भी वित्त मंत्री मंज़ूर कर सकते हैं. हालाँकि इससे सरकारी खजाने पर लगभग 25 हज़ार करोड़ रूपए का बोझ पड़ सकता है."

सरकार के इस आख़िरी बजट में सामाजिक क्षेत्र के लिए धन आवंटन बढ़ने की उम्मीद है. ख़ास कर ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना को देश के सभी ज़िलों में लागू करने की घोषणा हो सकती है.

 

आप अपनी राय भॆजॆं | संपादक कॊ पत्र लिखॆं | मित्र कॊ बतायॆं

 

 

Editor Pick's

bulletमिथिलाक विकास
bulletबिहार और बिहारी एक नजर
bulletमिथिलालाइव : एक वर्ष
bulletदियॆ कॆ निचॆ अनधॆरा हॊता है

 

|

More At Editor Pick's

 

करियर

AP

 

मिशन BPSC सामान्य‌ अधय्यन

सामान्य अधय्यन किसी भी लॊक सॆवा आयॊग द्वारा आयॊजीत परीक्षा की रीढ की हड्डी हॊती...

वर्ष 2008 : नौकरियॊं की भरमार

जासूसी रोमांचक रोजगार

मैथिली कविता

bulletसब सँ सुन्‍दर अछि जगत में हमर मिथिलाधाम

bulletहमर आशानन्‍द भाई

 

|

और भी...

 

Advertise

 

 

Feed Back  -   Tell Your Friend - Terms Of Use- Privacy Policy About Us  -  Contact Us  - Careers -Advertise With Us
© Adarsh Internet Pvt. Ltd. Benipatti Madhubani All Right & Trade Mark  Reserved info@mithilalive.com  Reg No BST-00875362