पटना। विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतीश
कुमार ने लापता बच्चों और गृह विभाग से गायब हुए गुमनाम पत्र से संबंधित
सवालों के उत्तर की जिम्मेदारी स्वयं संभाली। सदन में गृह विभाग का
प्रभार ऊर्जा मंत्री विजेन्द्र प्रसाद यादव के पास है। लेकिन सोमवार को
जब पूरक प्रश्नों की बौछार शुरू हुई तो श्री कुमार ने स्वयं मोर्चा संभाला
और आगे सवालों के लिए गुंजाइश ही नहीं छोड़ी।
एक मामला अपहरण से जुड़ा था। ऊर्जा मंत्री ने सदन में आंकड़े पेश किये।
बताया कि 2002 में 1948 में 366, 2003 में 1956 में 335, 2004 में 2566
में 411, 2005 में 2226 में 251, 2006 में 2301 में 194 और 2007 में
अपहरण के 2092 मामलों में से 89 फिरौती के थे। जुलाई 2003 से 2007 के बीच
2068 बच्चों का अपहरण हुआ। इनमें 1990 बरामद हो गये, 74 की हत्या हो गई
मगर 304 बच्चे आज भी लापता हैं। सवाल महेश्वर सिंह का था। श्री सिंह की
आशंका थी कि कहीं राज्य में निठारी जैसा कांड तो अंजाम नहीं पा रहा? इसी
क्षण मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि फिरौती के लिए
अपहरण के मामलों में लगातार गिरावट हो रही है। कुछ मामले प्रेम प्रसंग से
भी जुड़े हैं। जहां तक बच्चों का मामला है, वरीय पुलिस अफसरों को पूरी
संवेदनशीलता बरतने का निर्देश है। निठारी के बाद तो संवेदनशीलता और बढ़
गई है। इस कोण से भी जांच होती है। जो बच्चे लापता हैं, जब तक सटीक
जानकारी नहीं मिल जाती,आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता।
गृह विभाग से गायब हुए पत्र को ले जब अब्दुल बारी सिद्दीकी, भोला प्रसाद
सिंह, शकुनी चौधरी, डा.रामचंद्र पूर्वे, भगवान सिंह कुशवाहा, रामदेव वर्मा
ने पूरक सवाल दागने शुरू किये तो मुख्यमंत्री ने स्वयं कमान संभाली।
कहा-'गुमनाम पत्र कार्रवाई का आधार नहीं बन सकता। सचिवालय से कागज गायब
होता है तो एफआईआर होता है। कुछ लोग बात का बतंगड़ बना समाज में सनसनी पैदा
करना चाहते हैं।' उन्होंने विपक्ष को चुनौती दी-'आप लोग भी सरकार में रहे
हैं। ऐसे मामलों में आपने क्या कार्रवाई की! मार्गदर्शन कीजिए।' सवाल के
रूप में आये इस जवाब के बाद सब शांत पड़ गये। सदस्यों का कहना था कि जिस
गायब पत्र को ले वे सरकार से सूचना मांग रहे हैं, उसमें 15 आईपीएस
अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप थे। पत्र प्रकरण की सीबीआई
जांच की मांग भी उठी।