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एक बिहारी, सौ बीमारी: बाल ठाकरे
नवभारतटाइम्स.कॉम
Times News Network

मुंबई : महाराष्ट्र में क्षेत्रवाद को लेकर बयानबाजी का सिलसिला फिलहाल खत्म होता नहीं दिख रहा। पिछले दिनों महाराष्ट्र में क्षेत्रवाद और भाषावाद की कवायद शुरु की थी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने , अब शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे भी इसी मंत्र का जाप कर रहे हैं। ठाकरे ने पार्टी के मुखपत्र सामना में अपने संपादकीय में बिहार के सांसदों पर हमला बोला है और बिहार के लोगों के बारे में अपशब्द भी कहे हैं।

दरअसल बिहार के एम.पी. ने इस क्षेत्रवाद के विरोध में संसद में काफी हंगामा खड़ा किया , जिसपर बाल ठाकरे ने अपनी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा , ' पूरे देश में बिहार के बारे में कैसा बोला जाता है , यह मैं बताता हूं। दरअसल बिहारियों का भेजा ही सड़ा हुआ है। '

उन्होंने कहा कि पूरे हिंदीभाषियों को बिहारियों की वजह से तकलीफ होती है। पिछले दिनों मुंबई में बिहारियों के खिलाफ हुई हिंसा के मामलों पर पर्दा डालते हुए उन्होंने कहा , ' यहां एक दो लोगों को मारा, तो न्यूज चैनलों ने बेवजह का शोर-शराबा किया। बिहारी तो जिस थाली में खाते हैं , उसी में थूकते हैं। '

संसद में हंगामा करने वाले सांसदों पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा , ' बुझी हुई आग को फिर से हवा देने की कोशिश कर रहे हैं ये बिहारी सांसद। ' ठाकरे ने यह भी कहा कि कुछ दिन पहले बिहारी सांस्कृतिक संगठनों ने लालू छाप नेताओं को पत्र भी लिखा था कि हमें मुंबई में कोई तकलीफ नहीं है और आप यहां शक्ति प्रदर्शन कर के हमारे मामले में टांग न अड़ाएं।

समय-समय पर हिंदुत्व का नारा बुलंद करने वाले बाल ठाकरे ने बिहारियों के विरोध में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने तो यहां तक कह डाला कि , ' बिहारी गोबर खाते हैं। आखिर वह गोबर के कीड़े हैं और गोबर में ही खुश रहेंगे। '

उन्होंने जेडीयू नेता प्रभुनाथ सिंह के उस बयान पर भी टिप्पणी की जिसमें उन्होंने कहा था कि हम गंगा के किनारे रहते हैं और इसलिए हमारी बोली भी मीठी है। ठाकरे ने इस पर कहा कि , ' हमें पता है कि बिहार में भ्रष्टाचार और रक्त की गंगा बहती है। राम तेरी गंगा मैली हो गई है। बिहार नरक पुरी है। वहां के राजनेता पशुओं का चारा भी खा जाते हैं। '

शिवसेना सुप्रीमो ने बिहारियों के खिलाफ अपनी बयानबाजी का बचाव भी किया है। उन्होंने कहा कि पंजाब में भी बिहारियों को पसंद नहीं किया जाता और उन्हें लेकर पंजाब में इन दिनों एक एसएमएस भी चला हुआ है कि बिहारी भगाओ , पंजाब बचाओ। संपादकीय में यह एसएमएस भी छपा है -

' एक बिहारी , सौ बीमारी
दो बिहारी , लड़ाई की तैयारी
तीन बिहारी , ट्रेन हमारी
पांच बिहारी , सरकार हमारी
चक दे फट्टे
बिहारी भगाओ , पंजाब बचाओ


बोलेगा तो : क्या आप भी यह मानते हैं कि मराठी वोट बैंक हाथ से निकलता देखकर बाल ठाकरे तिलमिलाए हुए हैं और इसलिए राज ठाकरे से बढ़-चढ़कर भड़काऊ बातें कह रहे हैं ? या फिर आपको लगता है कि बिहार के लोग वास्तव में वैसे हैं जैसा ठाकरे कह रहे हैं। अपनी राय देने के लिए
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