पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार
को कहा कि बाल ठाकरे व राज ठाकरे द्वारा लगातार बिहारियों के खिलाफ चल रहे
वाकयुद्ध पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बैठक बुलाएं। मुख्यमंत्री ने कहा
कि इस मामले में केंद्र का हस्तक्षेप जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि
बैठक में बिहार व महाराष्ट्र के नेताओं को विशेष रूप से शामिल किया जाए।
प्रधानमंत्री को चाहिए कि वह इस मामले में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को
निर्देश दें। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री इस मामले में हस्तक्षेप
नहीं करते हैं तो माना जाएगा कि कांग्रेस को इस मसले में रुचि नहीं है।
भागलपुर जाने के क्रम में स्टेट हैंगर में संवाददाताओं से बातचीत में
नीतीश कुमार ने कहा कि महाराष्ट्र में बिहारियों के खिलाफ जो कुछ हो रहा
है उस पर वह समय-समय पर चिंता जताते रहे हैं।
बिहारियों के खिलाफ नियमित रूप से जहर
उगलने से माहौल बिगड़ता है। बोलते-बोलते लोगों को अपनी सीमाओं का ज्ञान नहीं
रहता। पर हमने अपने शब्दों का चयन इस प्रकार किया है कि किसी को दु:ख नहीं
हो। बिहारियों को मेहनत और ज्ञान के मामले में किसी से सर्टिफिकेट लेने
की जरूरत नहीं है। दुनिया को बिहार ने रोशनी दी है। बिहारियों का योगदान
किसी से छिपा हुआ नहीं है। बिहारियों को कहां-कहां जलील करेंगे। अगर कोई
बिहारियों के बारे में कुछ बोलता है तो हमारी प्रतिष्ठा और प्रतिभा
समाप्त नहीं हो जाती है। भारत एक है। किसी के पास दौलत है तो किसी के पास
हुनर। ऐसा नहीं कि महाराष्ट्र में सभी लोग बिहारियों के खिलाफ हैं। कुछ
लोगों के विचार की वजह से स्थिति गड़बड़ हो रही है। हर प्रकार के लोग सभी
जगह मौजूद हैं। यह भावनात्मक एकता का मामला है। हम एक-दूसरे की मदद के
बिना आगे नहीं जा सकते।
बोलेगा तो : क्या आप भी यह मानते हैं कि मराठी वोट बैंक हाथ से निकलता
देखकर बाल ठाकरे तिलमिलाए हुए हैं और इसलिए राज ठाकरे से बढ़-चढ़कर
भड़काऊ बातें कह रहे हैं ? या फिर आपको लगता है कि बिहार के लोग वास्तव
में वैसे हैं जैसा ठाकरे कह रहे हैं। अपनी राय देने के लिए
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