नयी दिल्ली/पटना। देश में ही नहीं बिहार में आबादी की
तुलना में पुलिस कर्मियों की संख्या सबसे न्यूनतम यानी एक लाख पर 79.27
है। उसके बाद के स्थानों में उत्तर प्रदेश 94.46 और पश्चिम बंगाल में
96.44 है। यह जानकारी केन्द्रीय गृहमंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने बुधवार
को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी। उन्होंने यह स्वीकार किया कि देश
में पुलिस जनता अनुपात बेहद कम है।
बुधवार को राज्यसभा में गृहराज्यमंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने बताया कि
एक जनवरी 2006 के अनुसार, यह अनुपात सर्वाधिक 940.62 नगालैंड में था जबकि
न्यूनतम 79.27 बिहार में है। इसके अलावा यह अनुपात उत्तर प्रदेश में
94.46 पश्चिम बंगाल में 96.44, हरियाणा में 207.93, जम्मू -कश्मीर में
541.39, मध्य प्रदेश में 112.14, महाराष्ट्र में 171.71 ,पंजाब में
278.25, राजस्थान में 115.13 तथा दिल्ली में 377.58 है। वर्ष 2001-02 के
दौरान भारत में प्रति लाख की आबादी पर पुलिस-जनता अनुपात 136.4 था जबकि
मैक्सिको में यह अनुपात 491.8, इटली में 559, अमरीका में 326.4 ,आस्ट्रेलिया
में 304.2, बेल्जियम में 357.5, सऊदी अरब में 386.5 ,जर्मनी में 303.2,
ब्रिटेन में 257.6, स्विटजरलैंड में 203.7, दक्षिण अफ्रीका में 224,
रोमानिया में 207.8, पोलैंड में 259, फिलीपीन्स में 141.3, नेपाल में
192.7, म्यांमार में 141.4, जापान में 182.2 तथा चिली में 193 था।
केन्द्रीय पुलिस बल एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि पिछले
तीन वर्षों में केन्द्रीय पुलिस बल में अल्पसंख्यक समुदायों के 12166
व्यक्तियों को भर्ती किया गया।
पहचान पत्र गृह राज्यमंत्री माणिकराव गावित ने बताया कि 29 फरवरी 2008 तक
11.50 लाख बहुउद्देश्यीय राष्ट्रीय पहचान-पत्र लगभग तैयार किए जा चुके
हैं जिनमें से 10 लाख चुनीन्दा क्षेत्रों में वितरित भी किए जा चुके है।
शीघ्र ही बाकी बचे राष्ट्रीय पहचान पत्र बनवाकर उनका बंटवारा कर दिया
जायेगा।