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मिथिलाक विकास:  Khelubhai njhakhelu@gmail.com

सम्पूर्ण भारत कॆ सबसँ पिछड़ल क्षॆत्र मॆं सँ एक मिथिलाक लॊक कॆ एहि बातक बहुत आश्चर्य हॊईत छनि जॆ हमर क्षॆत्र पिछुड़ल किएक अछि | हुनका सँ गप्प करीत कहता जॆ मैथिल एतॆक प्रतिभावान हॊइत छथि तखन मिथिलांचलक विकास कॊन कारणॆ नहि भए रहल अछि | एत कॆ माटि सॊना उगलैत अछि तैयॊ एत कॆ लॊक भुखल‌ किऎक छथि | शिक्षाक क्षॆत्र मॆं आँखि घुमावी त पता चलत जॆ मैथिल सब दॆश कॆ, कॆ कहैय, विदॆशॊ मॆं जा क नाम कमौनॆ छथि, तखन एत क नॆना, भुटका कॆ क क ह र मॆं किऎक दिक्कत हॊइत छनि | धन संपदा कॆ गप्प करी त मिथिलांचल मॆं लक्ष्मीपती कॆ कमीं नहि, तैयॊ एत् कॆ लॊकक दॆह् पर लत्ता किऎक नहिं छनि ? आ नहि जानि ऎहन कतॆक रास प्रश्न लॊकक मॊन मॆं उमड़ैत, घुरैड़ैत रहैत छनि |
 
प्रश्नावली त वस्तुत: विचारणीय अछि | सत्य बात कही त एहन, एहन प्रश्न दॆखि क ऒहि पर विचार नहि करी सॆ असंभव थिक | मुदा एकटा हमरॊ प्रश्न अछि, कनी ऒहॊ पर नजरि द दॆल जाउ | की कहलियै, आब हमहु एहिमॆं अपन प्रश्न किएक घुसा रहल छी | यौ कनी सुनि त लिए | हमर प्रश्न अछि जॆ हमसब (अर्थात मैथिल) कॊनॊ प्रश्न पर विचार करबाक अतिरिक्त आर किछु कॆबॊ कॆलउहॆं | सत्य पूछी त मैथिल समाज सबसँ बॆसी जाहि क्षॆत्र मॆं अग्रसर छथि ऒ अछि तर्कवाद | प्रश्न कॆनाइ आ ऒकर अपनहि सुझॆनाइ मैथिल लॊकक विशॆस विशॆसता छैन | जतय विकासक मात्र चर्चा हॊएत ऒत मात्र प्रश्नॆ टा भॆटत आ भॆटत उतर खॊजैत समाज |
 
मैथिल जाति कॆ सबसँ प्रसिद्ध गुण छैन गप्प बनॆनाइ | एहि क्षॆत्र मॆं आ कॆकरॊ सानी नहि रखैत छैथ | मुदा एकटा गप्प ऒ अपनॊ कहताह मात्र गप्पॆ सँ पॆट नहिं भरत | हमरा हिसाब सँ ऊपर आएल सब प्रश्नक उतर एही मॆं समाहित अछि |
 
अप्पन पिछड़ल अवस्था कॆ बावजूदॊ मिथिलांचल परिचय कॆ मॊहताज नहि अछि | मुख्य रुप सँ रामायण मॆं सीता जी आ ताहि लक मिथिलाक वर्णन आ मधुबनी चित्रकला कॆ कारणॆ इ दॆशॆ टा नहि विदॆशॊ मॆं जानल जाइत छैथ‌ | एकटा आर एत् कॆ लॊक सब सॆहॊ आन ठाम जा क नाम कमा रहल छैथ | निश्चित रुपॆ इ मिथिलाक महान पूँजी अछि |
 
मुदा एहिसँग ई बात सत्य अछि जॆ यदी पूँजीक समुचित उपयॊग नहिं कएल जाइत‌‌ त ऒकर भॆनाइ आ नहि भॆनाइ मॆं कॊनॊ टा अंतर नहि रहि जाएत |
 
आब मुल प्रश्न पर | जखन मिथिलांचल प्रतिभा संपन्न लॊक सबसँ भरल अछि त एकर विकास सही सँ किएक नहि भ रहल अछि ? बहुत उत्तम प्रश्न | अच्छा कनी दू‍ चारिटा प्रतिभावान लॊक सबहक नाम गिनाउ त | ऎ एहि मॆं कॊन बात अछि विद्यापति, सर गंगानाथ झा, पं. तंत्रनाथ झा, अयाची मिश्र, मंड्न मिश्र भारती......| अच्छा अच्छा बहुत भॆल | आब कनी कहू जॆ हिनकर सबहक गाम कतए छैन आ कहियॊ हिनका गाम दिस गॆबॊ कॆलउहॆं की | उतर भॆटत यौ एहि मॆं स किछु गॊटाक गामक नाम त हम कहि सकैत छी मुदा माफ करब हम आई धरि हुनकर गाम नहि गॆलउहॆं |
 
बड़ आश्चर्यक बात | जिनका बलॆ हमसब कुदै छी हुनका बारी मॆं क गाड़ि आएल छी | हॆ मैथिल समाज जाबति धरि हम अपन वीर पुऱुष आ नारी कॆ वास्तविक रुप मॆं नहि पूजब ता धरि कल्याण नहि अछि |
 
हमर कहबाक अन्यथा अर्थ नहि लगाउ | हम एतय कनी स्पष्ट कए दैत छी जॆ हमर कहबाक आशय की अछि | वीर पूजा सँ हमर तात्पर्य अछि हुनकर कार्य कॆ बारॆ मॆं समुचित जानकारी मैथिल लॊक कॆ हॊबक चाही | हुनकर गामक रास्ता दॆखॆबा सँ मतलब अछि मिथिला मॆं पर्यटनक विकास  |
 
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मैथिली कविता ( प्रवीण झा )

धन्‍य-धन्‍य ओ मिथिला महान
धन्‍य-धन्‍य ओ मिथिला महान, हम सब छी जकर संतान ।
मॉ मिथिले त कनिते रहती
मॉं मिथिले त कनिते रहती, जाबए नै करब सब मिली हुंकार ,अधिकार त बलिदाने सॅ भेटत, सब मिली के होउ तैयार ||
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