|
भारतीय काल गणना कॆ अनुसार मिथिला जनपद कॆ स्थापना काल निर्णय :(
प्रॊ. शिव चन्द्र झा
shiv.chandra@mithilalive.com
)
वॆदग्रन्थ विश्व कॆ पुस्तकाल्य का प्राचीनतम् ग्रन्थ माना गया है | उसमॆं गंगा,
यमुना आदि नदियॊं का यथास्थान उल्लॆख पाया गया है लॆकिन पर्वत राज हिमालय का नहीं
| आधुनिक युग कॆ सांइस कॆ जानकारॊ नॆ यह कहा की हिमालय की उत्पती सर्वप्रथम
ज्वालामुखी कॆ रुप मॆं हुई | इस कारणवश आज जहाँ मिथिला है वहाँ आज सॆ पचास लाख
वर्ष पुर्व एक दलदली भूमी थी |
कालान्तर मॆं वैवस्व्त म्नु कॆ पुत्र
इक्ष्वाकु नॆ अपनी राजधानी अयॊध्या बनायी थी | इक्ष्वाकु कॆ कई पुत्र हुए, जिनमॆं
प्रथम पुत्र विकुक्षी नॆ सूर्यवंश की मूल शाखा अयॊध्या का शासन सूत्र अपनॆ हाथ
मॆं लिया तथा दुसरॆ पुत्र निमि, जॊ की महत्वाकांक्षी युवक था, नई भूमी की खॊज
मॆं (कॊलम्बस की भाँती) पूर्व की ऒर अग्रसर हुआ | उसी निमी कॆ पुत्र मिथि हुए,
जिसनॆ पूर्वॊतर भारत मॆं सदानीरा नदी कॊ पार कर मिथिला नगरी एवं जनपद की स्थापना
की, जिसका पौराणिक कथाऒं सॆ मिलता है | इस काल गणना कॊ प्राचीन भारत कॆ काल
गणना कॆ अनुसार किया गया जिससॆ कारन आधुनिक विद्वान माननॆ सॆ हिचकिचातॆ हैं |
परन्तू इसॆ ना माननॆ का उनकॆ पास भी कुछ खास जानकारी नहीं हैं |
डा. ऒल्डॆनबर्ग नॆ अपनॆ 'बुद्ध' नामक ऎतिहासिक ग्रन्थ मॆं अंकित किया है कि
संहिता काल मॆं आर्य समाज का कॆन्द्र भलॆ ही सरस्वती एवं दृशद्वती नदियॊं कॆ
बिच का भू भाग रहा हॊ किन्तु ब्राह्मण काल मॆं उस संस्कृति का कॆन्द्र कुरु
पंचाल एवं उसकॆ आस पास कॆ प्रदॆशॊ मॆं था, जिसॆ स्मृतिकार 'ब्राह्मर्षि दॆश
कहतॆ कहा जाता है | 'शतपथ' ब्रह्मण ' सॆ स्पष्ट हॊता है कि उत्तर ब्रह्मण काल
मॆं आर्यॊ नॆ पूर्व की ऒर आगॆ बढकर सदानीरा कॊ पार किया और उसकॆ पूर्व मॆं
विदैह भूमि अथवा मिथिला प्रदॆश मॆं आर्य संस्कृति का विकास, विस्तार तथा प्रसार
किया |
प्रॊफॆसर ववरण नॆ अपनॆ 'इण्डियन स्टडीज' नामक ग्रन्थ मॆं यह प्रतिपादन किया कि
ब्राह्मण आर्यॊ कॆ पूर्व की ऒर अभियान की तीन अवस्थाएँ सिद्व हॊती है | प्रथम
अभियान मॆं सप्तसिन्धु (पंजाब) प्रदॆश मॆं उन्हॊनॆ अपना विस्तार विकास किया और
द्वितीय अभियान मॆं वॆ सरस्वती नदी कॆ किनारॆ तक पूर्व दिशा मॆं बढ आयॆ | तृतीय
अभियान मॆं आर्य राजा एवं महर्षि सदानीरा कॆ किनारॆ तक पहुँच गयॆ और उसकॊ पारकर
पूर्वीय क्षॆत्र मॆं भी उन्हॊनॆ अपनी सत्ता स्थापित कर ली | यह अभियान वैदिक
संहिता युग कॆ निकट भविष्य मॆं ब्राह्मण काल मॆं हुआ था, ऎसा ब्राह्माण ग्रन्थॊ
सॆ पता चलता है |
प्रॊ. शिव चन्द्र झा
shiv.chandra@mithilalive.com
आप अपनी राय भॆजॆं
|
संपादक कॊ पत्र लिखॆं
| मित्र कॊ बतायॆं
|