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प्रवासी हिन्दुओं पर अत्याचार: मौन खड़ी
भारत सरकार :
Pravin Jha pkjhapatna@gmail.com
मुस्लिम बहुल देश मलेशिया में भारतीय मूल के अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर अनवरत जुल्म ढाये जा रहे हैं । विभिन्न तरह के कानून लागू कर वहॉ के हिन्दु जनमानस के प्रताडित किया जा रहा है । इतना हीं नहीं मलेशिया की अब्दुल बदाफी सरकार के संरक्षण में वहॉं हिन्दुओं के मंदिरों को भी तोड़ा जा रहा है । मध्यकालीन भारत में मुस्लिम शासकों द्वारा जिस तरह हजारों हिन्दु मंदिरों को तोड़ दिया गया, आज 21 वीं सदी में भी मलेशिया की अब्दुल बदाफी सरकार उसी मानसिकता और इतिहास को दुहरा रही है और हमारी तथाकथित पंथ निरपेक्ष भारत सरकार मौन है । कांग्रेस की अगुवाई वाली हमारी वर्तमान यूपीए सरकार इस मुद्दे पर मलेशिया सरकार के पास अपना कोई विरोध भी नहीं दर्ज करा रही है । पता नहीं भारत सरकार मलेशिया सरकार से डर रही है अथवा जानबूझकर ऑंखे मूंदकर बैठी हुई है । ऐसा लगता है मानो भारत सरकार को मलेशिया में रहने वाले भारतीय मूल के प्रवासी हिन्दुओं से कोई लेना-देना नहीं है । बेशर्मी की हद तो तब हो गई जब मलेशियाई हिन्दु संगठन “हिंड्राफ” के प्रतिनिधि भारत सरकार से मिलकर उसे अपनी समस्या से अवगत कराने आये और भारत सरकार ने इस संस्था के प्रतिनिधियों से मिलना भी मुनासिब नहीं समझा । आखिर भारत में “प्रवासी भारतीय दिवस” मनाने का क्या मतलब है ? पंथनिरपेक्षता का नकली जामा ओढे कुछ भारतीय राजनीतिक दलों को ऐसे मुद्दों पर बोलने में अपना पंथनिरपेक्षता का ध्वज गिरजा नजर आता है । जाहिर है, मुस्लिम वोट बैंक बिगड़ने के डर से हीं ये राजनीतिक दल ऐसे मुद्दों पर चुप्पी साध लेते हैं । दरअसल, इनकी पंथनिरपेक्षता की परिभाषा हीं बिल्कुल अलग है । अगर हिन्दुओं पर कहीं अत्याचार हो तो ये चुं नहीं बोलते और अगर मुस्लिमों पर कही जोर-जुल्म हो जाय तो यही राजनीतिक पार्टियॉं हाय-तौबा मचाने लगती हैं । गौरतलब है कि जब बाबरी मस्जिद विध्वंश हुआ था तो विश्व के अनेक मुस्लिम देशों ने न सिर्फ अपना विरोध दर्ज कराया था, बल्कि इसके प्रतिक्रिया स्वरूप इन देशों ने अपने देश में अनेक हिन्दु मंदिरों को ताड़ डाला था । धर्म के नाम पर विश्व में अगर कहीं भी किसी समुदाय पर जुल्म ढाये जाते हैं, तो इसकी भर्त्सना होनी चाहिए । क्या अपने उपर्युक्त शर्मनाक रवैये से भारत सरकार विश्व के प्रवासी हिन्दुओं से अपने को जोड़ सकती है । भारत सरकार का यह ढुलमुल रवैया तो अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय में इसकी साख और प्रतिष्ठा को ही धूमिल करेगा और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर यही संदेश जाएगा कि भारत अपने सनातन विरासत से जुड़े लोगों पर हुए जुल्मो-सितम पर मौन रहता है । आप अपनी राय भॆजॆं | संपादक कॊ पत्र लिखॆं | मित्र कॊ बतायॆं |
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