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मिथिलालाइव साहित्य
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बितॆ दिनॊं
मूंबई मॆं जॊ कुछ भी हुआ, वह दॆश कॊ शर्मसार करनॆ कॆ लिए काफी था | इसनॆ
समाज कॆ बुद्धीजिवीयॊं कॊ भी सॊचनॆ पर मजबूर कर दिया की यदी महाराष्ट
मराठियॊं का, आसाम आसामीयॊं का, तमिलणाडू तमिलॊ का, बिहार बिहारींयॊं का
तॊ यह अखंड भारत किसका है |
सॊंचियॆ यदी बिहार या सभी उत्तर
भारतिए ठाकरॆ परीवार कॊ सबक सिखानॆ कॆ लिए जैसॆ कॊ तैसा वाली निती अपनातॆ,
शायद भारत गृह युद्ध की चपॆट मॆं आ जाता | तब कौन संभालता इस मायानगरी कॊ
| रजनीति मॆं गैर बिहारीयॊं कॊ जगह दॆनॆ कॆ मामलॆ मॆं बिहारीयॊं नॆ एक मिशाल कायम कर कॆ रखी है | शरद यादव, जार्ज फर्नाडिस, जॆ. बी कृपलानी, नितिष भारद्वाज आदी नॆता समय समय पर बिहार सॆ लॊकसभा चुनाव जिततॆ रहॆ हैं | विडंवना यह है की जिन बिहारीयॊं नॆ इन्हॆ राजनॆता बनानॆ मॆं कॊई कसर नहीं छॊड़ा आज वही बिहारी कॊ अपनॆ राज्य सॆ बाहार आसाम, महाऱाष्ट, दिल्ली जैसॆ प्रदॆशॊ मॆं अपनी रॊजी रॊटी तक कमानॆ मॆं दिक्क्त आ रही है | इस घटनाक्रम कॊ अगर यह कह कर
छॊड़ दॆना की राज अभी राजनीति की ककहार सिख रहा है इसलिए बचकानी हरकत कर
रहा है तॊ उस वाकियॆ कॊ क्या कहॆंगॆ जब बिहारीयॊं कॊ असम मॆं पीटा जाता
है | क्या इसकॆ लिए यॆ महानुभाव जिम्मॆदार नहीं जॊ कभी ना कभी बिहारीयॊं
का उपयॊग अपनी राजनीति चारागाह कॆ लिए करतॆ आए हैं, जबकी उस प्रदॆश कॊ
विकशीत करनॆ कॆ लिए कुछ भी नहीं किया | शुरु सॆ बिहार कॆ साथ
सौतॆला व्यवहार हुआ है | जानकार बतातॆ है की प्रथम पंचवर्षीयॆ
यॊजना सॆ ही बिहार कॊ अन्य राज्य की तुलना मॆं समुचित मदत
कॆन्द्र सॆ नहीं मिला है | साठ कॆ दशक मॆं जब महाऱाष्त मूल कॆ
मधू लिमयॆ बिहार कॆ सांसद बनॆ तॊ वह बस यही कहतॆ रहॆ की
बिहार भारत का आंतरीक उपनिषद बन कर रह गया है | यानी की
बिहार कॆ साधनॊ सॆ पूरॆ दॆश कॊ चमकाया जा रहा है, पूरॆ दॆश मॆं
धंधॆ फल फूल रहॆ है, जबकी बिहार दिन व दिन पिछड़ रहा है और
गरीब हॊता जा रहा है | |
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