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मिथिलालाइव साहित्य
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पटना। महंगाई के मसले पर मंगलवार को
विधानसभा में जोरदार हंगामा हुआ। बजट सत्र के लिए यह इस मायने में
अभूतपूर्व रहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य काफी देर तक आपस में उलझे
रहे। भारी शोर-शराबा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भड़क गये। विपक्षी सदस्यों
को जोर से डपटते हुए उन्होंने कहा-'चुप .., बैठिये। फालतू बात करते हैं।
.. 'तितकी' लग रहा है! चुनाव में पता चलेगा।'
महंगाई के लिए दोनों पक्ष एक-दूसरे को आरोपित कर रहे थे। विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने कहा कि बुधवार को सदन में इस मसले पर दो घंटे की विशेष बहस होगी। यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री का था। शून्यकाल में किशोर कुमार ने बढ़ी महंगाई के हवाले कहा कि आम लोगों का जीना दूभर हो गया है और केंद्र सरकार सोयी है। राज्य सरकार भी अपने करों में कुछ कमी कर आवश्यक वस्तुओं की कीमत नियंत्रित करे। वे वेल में चले आए और सत्ता पक्ष के कमोवेश तमाम सदस्य विपक्षी सदस्यों की ओर इशारा करते हुए जोर-जोर से बोलने लगे। वस्तुत : वे संप्रग के घटक दलों को महंगाई के लिए जिम्मेदार बता रहे थे। ठीक इसी तर्ज पर राजद, कांग्रेस, लोजपा आदि के सदस्यों ने भी भाजपा-जदयू को आरोपित करना शुरू किया। सभी अपनी सीटों पर खड़े थे। कुछ स्पष्ट सुनाई नहीं पड़ा। हां, यह जरूर दिख रहा था कि दोनों पक्ष के सदस्य खासे उत्तेजित थे। विपक्ष की कमान जगदानंद के हाथ थी। बात तब और भड़क गयी जब संसदीय कार्य मंत्री रामाश्रय प्रसाद सिंह ने विपक्ष की ओर इशारा करते हुए कह दिया कि 'उल्टे चोर कोतवाल को डांटे।' अध्यक्ष जब सदस्यों को शांत कराने में विफल रहे तो वे आसन छोड़कर खड़े हो गये। परंपरा के मुताबिक सदस्यों को अपनी सीटों पर बैठना पड़ा लेकिन तुरंत दोनों पक्षों का आरोप-प्रत्यारोप फिर शुरू हो गया। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा-'महंगाई को ले सदन उबाल पर है। अध्यक्ष महोदय, इस पर दो घंटे का वाद-विवाद करा लिया जाये।' विपक्षी सदस्य, खासकर राजद विधायक शोर-शराबा करने लगे। मुख्यमंत्री भड़क गये। कहा-'ये क्या तरीका है! मैं बोल रहा हूं। मुझको बोलने नहीं दीजियेगा! फालतू बात .., चुप, बैठिये। चुनाव में पता चलेगा। बहस से भाग क्यों रहे हैं! तर्क-तथ्य सुनने की ताकत नहीं है!' विपक्ष की जोरदार आवाज फिर गूंजने लगी। सत्ता पक्ष ने भी इसी अंदाज में जवाब दिया। अंतत: विपक्ष ने भी सरकार के इस प्रस्ताव को मान लिया कि बुधवार को महंगाई पर वाद-विवाद हो। |
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