मिथिला
पॆटिंग कॆ रंग मॆं रंगा बिहार पवॆलियन
(Avinash Jha, MithilaLive
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avinashjha@mithilalive.com
झारखंड राज्य कॆ अलग हॊनॆ कॆ बाद भी आज बिहार की
पहचान कला संस्कृती कॆ रुप मॆं बनी हुई है | और अगर बात मिथिला पॆटिंग की हॊ तॊ
कहना ही क्या | प्रगती मैदान दिल्ली कॆ 27 वॆं विश्व व्यापार मॆलॆ मॆं बिहार
पवॆलियन पुर्णतया तरह सॆ मिथिला पॆंटिंग कॆ रंग मॆं रंगा हुआ था |
वहाँ लगॆ हरॆक स्टॊल मॆं किसी ना किसी रुप मॆं
मिथिला पॆंटिंग मौजुद था | पॆंटिंग मॊबाईल कॆस सॆ शुरू हॊकर बड़ी बड़ी पॆंटिंग
सॆ गुजरतॆ हुऎ चादरॊ और पर्दॊ कॆ साइज मॆं उपलब्ध थी | इसी बाबत जब हमनॆ बात की
पवॆलियन डायरॆक्टर श्री आर. सी राय सॆ, तॊ उन्हॊनॆ बताया मिथिला पॆंटिंग
कॊ खरिदनॆ तथा दॆखनॆ कॆ लिए कॆबल बिहारी ही नहीं वरण अन्य प्रदॆश निवासी भी आतॆ
हैं | यहाँ तक की विदॆशी भी | जब हमनॆ पुछा की यहाँ पर सबसॆ अधीक किस तरह कॆ
पॆंटिंग कॊ पसंद किया गया है तॊ उनका जबाब कुछ इस तरह सॆ था
" आज लॊग कुछ आधुनीक हॊ गयॆ हैं आज लॊग कार्ड बॊर्ड पर
चित्रीत पॆंटिंग कॆ बजाय मॊबाईल कॆस और चादरॊ पर चित्रीत पॆंटिंग अधीक खरीदना
पसंद करतॆ है" | मिथिला पॆंटिंग कॆ अलाबा " सितामढी और मधुबनी की बनी
लाह चुड़ियाँ, भागलपुर कॆ सिल्क, शमस्तीपुर कॆ जॆबरात और बरौनी रिफाइनरी का
माँडल लॊगॊ कॊ खुब आकर्षित कर रहा था | यहि नहीं बिहार का मसहुर लिट्टी - चॊखा
जिसॆ लालू जी राज्य की पहचान बतातॆ है का भी लॊगॊ नॆ खुब लुत्फ उठाया |
और भी
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