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संस्कृत
भाषा
07-11-07 02:54 AM
संस्कृत भारत की एक शास्त्रीय भाषा है ।
ये दुनिया की सबसे पुरानी उल्लिखित भाषाओं में से एक है । संस्कृत
हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार की हिन्द-ईरानी शाखा की हिन्द-आर्य उपशाखा में शामिल
है । ये आदिम-हिन्द-यूरोपीय भाषा से बहुत ज़्यादा मेल खाती है । आधुनिक भारतीय
भाषाएँ जैसे हिन्दी, उर्दू, कश्मीरी, उड़िया, बांग्ला, मराठी, सिन्धी, पंजाबी,
(नेपाली), आदि इसी से उत्पन्न हुई हैं । इन सभी भाषाओं में यूरोपीय बंजारों की
रोमानी भाषा भी शामिल है । संस्कृत में हिन्दू धर्म के लगभग सभी धर्मग्रन्थ लिखे
हुए हैं । आज भी हिन्दू धर्म के ज़्यादातर यज्ञ और पूजाएँ संस्कृत में ही होती
हैं ।
ध्वनि-तन्त्र और लिपि
संस्कृत भारत की कई लिपियों में लिखी जाती रही है, लेकिन आधुनिक युग में
देवनागरी लिपि के साथ इसका ख़ास रिश्ता है । देवनागरी लिपि असल में संस्कृत के
लिये ही बनी है, इसलिये इसमें हरेक चिन्ह के लिये एक और सिर्फ़ एक ही ध्वनि है
।देवनागरी में १२ स्वर और ३४ व्यंजन हैं । देवनागरी से रोमन लिपि में
लिप्यान्तरण के लिये दो पद्धतियाँ मशहूर हैं : IAST और ITRANS । शून्य या एक या
अधिक व्यंजनों और एक स्वर के मेल से एक अक्षर बनता है।
व्याकरण
संस्कृत व्याकरण आधुनिक भाषाएँ बोलने वालों के लिये कठिन है । इसमें हिन्दी या
अंग्रेज़ी की तरह ज़्यादा उपसर्ग (prepositions) नहीं होते । संस्कृत में संज्ञा,
सर्वनाम, विशेषण और क्रिया के कई तरह से शब्द-रूप बनाये जाते हैं, जो व्याकरणिक
अर्थ प्रदान करते हैं । अधिकांश शब्द-रूप मूलशब्द के अन्त में प्रत्यय लगाकर
बनाये जाते हैं । इस तरह ये कहा जा सकता है कि संकृत एक
बहिर्मुखी-अन्त-श्लिष्टयोगात्मक भाषा है ।
वैदिक संस्कृत और काव्य संस्कृत
संस्कृत का प्राचीनतम रूप वैदिक संस्कृत है, जो हिन्दू धर्म की प्रमुख किताब
वेद की भाषा है । ज़्यादातर लोग पाणिनी की अष्टाध्यायी से काव्य संस्कृत की
शुरुआत मानते हैं । रामायण, महाभारत और पुराण काव्य संस्कृत में लिखे गये हैं ।
लॆखक नागॆन्द्र झा
khelubhai@mithilalive.com
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