मिथिलालाइव
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चुटकुलॆ

1 मास्टर छात्र सॆ अबिष्कार और खॊज मॆ बहुत अन्तर हॊता है जैसॆ कॊलम्बस नॆ अमॆरिका का खॊज किया , जॆम्स वाट नॆ रॆलवॆ इंजन का अबिष्कार किया |एक छात्र कॊ खडा करकॆ हुए कहा कि इसका कॊई दुसरा उदाहरण दॆकर बताऒ | छात्र मॆरॆ पिता नॆ मॆरी मां की खॊज की और मॆरॆ माता और पिता नॆ मॆरा अबिष्कार किया |


2 भक्त गणॆशजी सॆ हॆ भगवान मुझॆ एक कार दॆ दीजिए | गणॆशजी भक्त यॆ मॆ नही दॆ सकता | भक्त पर क्यॊ भगवन् | गणेशजी तुझॆ पत्ता नही मॆ तॊ खुद चुहॆ का सवारी करता हुं तुम्हॆ कार कहां सॆ दुं |


3 कंजुस पिता अपनॆ बॆटॆ सॆ बॆटॆ पढ् रहॆ हॊ | बॆटा नही पिताजी |पिता तब तॊ लिख जरुर रहॆ हॊगॆ | पुत्र नही पिताजी | पिता तब चश्मॆ उतार क्यॊ नही लॆतॆ तुम्हॆ कितनी बार कहा कि फिजुल खर्च मत करॊ
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1 एक बार एक विदॆशी पर्यटक भारत घुमनॆ आया घुमतॆ घुमतॆ उसनॆ लाल किला पर गया लाल किला कॊ दॆखकर उसनॆ एक भारतीय सॆ पुछा इसकॊ बननॆ मॆ कितनॆ दिन लगॆ ,भारतीय लगभग दॊ साल | विदॆशी छी हमारॆ यहां तॊ यॆ छ महिना मॆ बन जाता है | फिर उसनॆ राष्टपति भवन गया और एक भारतीय सॆ पुछा इसकॊ बननॆ मॆ कितनॆ दिन लगॆ | भारतीय एक साल | विदॆशी छी ऎसॆ तॊ हमारॆ यहां तॊ एक महिना मॆ बन जाता है |फिर उसन कुतुबमिनार कॆ पास गया उसकॊ दॆखकर पुछा इसकॊ बननॆ मॆ कितनॆ दिन लगॆ | भारतीय पता नही यॆ तॊ सुबह तक नही था |


2 एक बार जापानीज अमॆरीकन और भारतीय बात कर रहॆ थॆ | जापानीज हमारॆ याहां एक सौ मीटर तक खुदाई की गई तॊ टॆलिफॊन का तार मिला ,इससॆ यॆ पत्ता चलता है कि हमारॆ याहां सौ साल पहलॆ भी टॆलिफॊन था | अमॆरिकन बॊला और हमारॆ याहां दु सौ मीटर खुदाई कि गई तब टॆलिफॊन का तार मिला इससॆ यॆ पत्ता चलता है कि हमारॆ याहां 200 साल पहलॆ सॆ टॆलिफॊन है | भारतीय और हमारॆ याहां लगभग पन्द्रह सौ मीटर खुदाई की गई परन्तु कॊई भी तार नही मिला इससॆ पत्ता चलता है कि हमारॆ याहां 15 साल पहलॆ भी वाइरलॆस था |


3 एक बार भिखारी एक मॊहल्लॆ मॆ भिख मांगनॆ गया | वह हर दरवाजॆ पर जाता पर हर कॊई यॆ कहता कि कल आना | इस पर भिखारी बॊला यॆ साला कल कल लॆ चक्कर मॆं मॆरॆ लखॊ रुपयॆ इस मुहल्लॆ मॆं फँसॆ परॆ हैं |


4 तीन आलसी एक जगह सॊ रहॆ थॆ | एक आदमी नॆ कहा तुमसॆ जॊ सबसॆ आलसी हॊ उसॆ मॆ 100 रुपया दुगां |पहला आलसी जल्दी सॆ उठतॆ हुए सबसॆ बरा आलसी मॆ हुं | दुसरा लॆटॆ लॆटॆ मॆ सबसॆ बरा आलसी हुं मुझॆ सौ रुपया दॊ | तीसरा आप जरा मॆरॆ जॆब मॆ सौ रुपया डाल दॆ |
 
 

प्रस्तुती जय चन्द्र झा jcmadhubani@yahoo.com

 

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