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चुटकुलॆ
एक बार एक विघालय मॆ जाँच अघिकारी जाँच करनॆ आयॆ | जाँच अघिकारी एक वर्ग
मॆ गयॆ और शिक्षक सॆ बॊलॆ अभी आप कौन सी विषय पढा रहॆ थॆ | शिक्षक बॊलॆ
अभी मॆ रामायण कॆ विषय मॆ बच्चॊ कॊ कुछ समझा रहॆ थॆ | जाँच अघिकारी नॆ एक
बच्चॆ सॆ पुछॆ बॊलॆ कि शिवजी का धनुष किसनॆ तॊडा | बच्चॆ नॆ डरतॆ हुए कहा
सर मॆ तीन चार दिन सॆ विघालय सॆ अनुपस्थित था | इसलिए मुझॆ कुछ नही मालुम
है ,आप किसी और बच्चॆ सॆ पुछ लॆ | अघिकारी जी नॆ कई बच्चॊ सॆ पुछॆ लॆकिन
कॊई भी सही जबाब ना दॆ सका | फिर उन्हॊनॆ शिक्षक सॆ पुछॆ कि आप ही बताईयॆ
कि शिवजी का धनुष किसनॆ तॊडा | शिक्षक महॊदय भी दंग रह गयॆ ,लॆकिन उन्हॊनॆ
कहा कि प्रघानाअघ्यापक जी सारा दिन आँफिस मॆ बैठॆ रहतॆ है ,हॊ सकता है कि
धनुष उनसॆ ही टुट गया हॊ आप एक बार जाकर उनसॆ पुछ लॆ |जाँच अघिकारी
कार्यालय मॆ गयॆ और प्रघानाअघ्यापक सॆ यही प्रश्न पुछॆ | अघ्यापक जी कहा
कि हमारा विघालय तॊ चार बजॆ बंद हॊ जाती है, परन्तु लालु यादव द्वारा
निर्मीत चरवाहा विघालय चार बजॆ कॆ बाद खुलती है ,हॊ सकता है कि उस विघालय
कॆ बच्चॆ आकर धनुष कॊ तॊड दिया हॊ | इसलिए आप लालु यादव जी सॆ बात करॆ |
अघिकारी जी पत्र द्वारा लालु जी कॆ सुचित कियॆ | एहि पत्र पढी लालु जी
सीघा संसद पहुचॆ ,और इस बात पर संसद मॆ बहस चलनॆ लगा | सभी एक दुसरॆ कॊ
दॊष दॆनॆ लगॆ | लालुजी नॆ अन्त मॆ कहा कि यह धनुष उस समय टुटा जब अटल जी
और लालकूष्ण जी राम रथा लॆकर पुरॆ शहर मॆ घुम रहॆ थॆ ,उसी रथ कॆ निचॆ यह
धनुष आ जानॆ सॆ धनुष टुट गया | इस बात पर अटल जी बॊलॆ कि यह बात सरासर
झुठ है ,यदि मै धनुष तॊडा हॊता तॊ मॆरी शादी हॊ गया रहता |
प्रस्तुती जय चन्द्र झा
jcmadhubani@yahoo.com |