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| MithilaLive > साहित्य >>गॊनु झा की कहानियाँ >> गॊनु झा नॆ बैल खरिदा |
कहानी (8) एक टॊकरा धान :-
मिथिला मॆ कमला नाम की नदी है' उस नदी कॆ किनारॆ गॊनु झा का खॆत था लॆकिन उपज
कभी नही हॊती थी सब साल धान कमला नदी की बाढ सॆ बह जाता था | गॊनु झा चिन्ता करनॆ
लगॆ |
आखिर उन्हॊनॆ कमला नदी सॆ विनती की हॆ कमला माता यदि इस साल धान की उपज खुब हॊ तॊ
101 जिवॊ की वलि दुगां | उस साल गॊनु झा कॆ खॆत मॆ खुब धान हुआ गॊनु झा बहुत खुश
हुए लॆकिन दुसरी चिन्ता उन पर सवार हॊ गई 101 जीव लायॆ कहां सॆ लायॆ ?
उनकॊ एक् उपाय सुझा उन्हॊनॆ 101 मच्छर
कॊ मार कर कमला नदि मॆ बहा दिया | रात मॆ गॊनु झा कॊ सपनॆ मॆ कमला नदि आयी गॊनु झा
हाथा जॊरकर बॊल मुझसॆ क्या
अपराध हुआ है | कमला नदि क्रॊध मॆ बॊली जाऒ तुमा कितना भी खॆती करॊ एक टॊकरा ही धान
हॊगा | गॊनु झा की नींद टुट गई फिर उन्हॆ एक उपाय सुझा | धरती कॆ अन्दर एक बहुत बरा
गढा खॊदा उसकॆ मुंह कॆ लिए बहुत छॊटी जगह छॊरी उस पर एक
टॊकरा रख दिया | उस टॊकरॆ कॆ पॆंदॆ मॆ
छॆद कर दिया |
गॊनु झा अपनॆ मजदुरॊ सॆ कहा जितना भी धान हॊता है | उस टॊकरॆ
मॆ रखतॆ जाऒ | मजदुरॊ ऎसा ही किया | मजदुर सारा दिन रखतॆ रह गयॆ; किन्तु वह टॊकरा
नही भरा | एक दॊ मन कॊ कौन पुछॆ सौ मन धान रखा जा चुका था रात हॊ आयी मजदुर सब थक
गयॆ | दुसरॆ दिन कॆ लिए काम छॊर दिया गया | रात मॆ गॊनु झा कॊ फिर सपनॆ मॆ कमला आयी
गॊनु झा कॊ पीठ ठॊकर बॊली तुम जीतॆ मै हारी |
समाप्त
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