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आइबे रहल ऐच्छ फगुआ
श्री जीतमोहन झा (जीतू) 
मैथिल और मिथिला
आहा के हँसब कमाल रहे साथी !
हमरा आहा पर मलाल रहे साथी !!

दाग चेहरा पर दे गेलो आहा !
हम त सोच्लो गुलाब रहे साथी !!

रैत मs आबई अछि अहि के सपना !
दिन मs अहिके ख्याल रहे साथी !!

उइड़ गेल निंद हमर रैत के !
आहा'क एहने सवाल रहे साथी !!

करै लए गेल छलो दिलक सौदा !
कियो आयल छलैथ दलाल साथी !!

आहा के हँसब कमाल रहे साथी !
हमरा आहा पर मलाल रहे साथी !!
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मौलिक स्रोत :- मैथिल और मिथिला
कविताँए

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