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स्‍वर्ग सॅ सुन्‍दर मिथिलाधाम   प्रवीण झा,
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स्‍वर्ग सॅ सुन्‍दर मिथिलाधाम मंडन, अयाची, राजा जनक के गाम।
जाहि ठाम‌ उगना बनला महादेव विद्यापति केर जानि यौ ।।
स्‍वर्ग सॅ सुन्‍दर मिथिलाधाम मंडन, अयाची, राजा जनक के गाम।

हमरा मीता मोन लगैत अछि अपने प्रांतक नगरी में
मिथिलाक बोल अनमोल लगैत अछि, मिठका बेर जेहन सबरी के ।
झुकि, झुकि करै छी हम माइ के प्रणाम, मंडन, अयाची, राजा जनक के गाम।।

बारिये, झाडि.ये साग भॆटैत अछि, चारहि पर तिलकोर यौ,
ई त पाहुन जिनकर खेता, नहीं  बिचकेता ठॊर यौ ।
स्‍वागत में भॆट‍तनि पान और मखान, मंडन, अयाची, राजा जनक के गाम ।
जाहि धाम  उगना बनला महादेव विद्यापति केर जानि यौ ।।
 
स्‍वर्ग सॅ सुन्‍दर मिथिलाधाम
कमला-कोसी बलान जतए झर-झर गीत सुनाबै छै, सबहक मुह में पानक लाली,
मिथिला भूमि कहाबै छै । सीता बहिन छथि, पाहुन राम: मंडन, अयाची, राजा जनक के गाम ।

स्‍वर्ग सॅ सुन्‍दर मिथिलाधाम* मंडन, अयाची, राजा जनक के गाम।
जाहि धाम उगना बनला महादेव विद्यापति केर जानि यौ ।।

 
प्रस्तुती प्रवीण झा pkjpatna@gmail.com 
प्रवीण झा,  पूर्व मध्‍य रेल, पटना (भाई लोकनि अपने सब सॅ आग्रह जे मिथिला लाईवक चैटरूम में आबी आ सप्रेम गप-शप करी ।)
 
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