मुंबई बसु वा दिल्ली, चाहे कोलकाता, आसाम |
मैथिल भाई हमर प्रणाम । मैथिल भाई हमर प्रणाम ।।
मिथिला के गौरव थिक मैथिल, निज गौरव के ध्यान करी ।
राजा
जनक के मान के राखी, सीता के गुणगान करी ।।
नेपाल बसी वा लंदन, चाहे अमेरिका, जापान ।
मैथिल भाई हमर प्रणाम । मैथिल भाई हमर प्रणाम ।।
मिथिला के जन-जन थिक मैथिल, शान अपन सदिखन राखब ।
अपन
भाषा अपन पाबनि, कखनो नहि आहॉ बिसरब ।
पटना
बसी वा रांची, चाहे एमपी, राजस्थान ।
मैथिल
भाई हमर प्रणाम । मैथिल भाई हमर प्रणाम ।।
“मिथिला लाईव” में नित आबी अहॉ सब, निज भाषा के प्रचार करी ।
ऑफिस
में अहॉ काज करी वा जे अपन रोजगार करी ।
अहॉ
सरस नहि बिसरब, मिथिला के पान-मखान ।
मैथिल भाई हमर प्रणाम । मैथिल भाई हमर प्रणाम ।।
प्रवीण
झा, पूर्व मध्य रेल, पटना (भाई लोकनि अपने सब सॅ आग्रह जे मिथिला
लाईवक चैटरूम में आबी आ सप्रेम गप-शप करी ।)
प्रस्तुती
प्रवीण झा
pkjpatna@gmail.com
मजॆदार चुटकुलॆ दुसरा पॆज |