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प्‍यार के फूल  प्रवीण झा
प्‍यार के लिए दुनियॉ ने कितना तरसाया ।
तब कहीं जा के मैंने तेरा साथ पाया ।।
जिस मूरत को था मैंने दिल में बसाया ।
 वही हमसफर मेरे जीवन में आया ।।
 
वफा की डगर पे मुझे चलना सिखाया ।
मेरे सूने मन में दीया प्रेम का जलाया ।।
भला हूँ, बुरा हूँ, मुझे अपनाया, सोचता हुँ मैं हरपल क्‍यूं तुझे सताया ।
 खता की मैंने जो तेरा दिल दु:खाया ।।
 
 प्‍यार के फूल मुझ पर सदा हीं बरसाना ।
 मेरे ख्‍वाबों में आना, मेरे दिल में समाना ।।
वादा करो तुम मेरा साथ दोगी । मेरी हो तो मेरी बन के रहोगी ।।
 किसी मोड़ पर जब मैं खो जाऊंगा तब, न रूठोगी मुझसे, सहारा बनोगी ।।
 
प्रस्तुती प्रवीण झा pkjpatna@gmail.com      
प्रवीण झा, 
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स्‍वर्ग सॅ सुन्‍दर मिथिलाधाम
मैथिल भाई हमर प्रणाम
सत्तहवां सावन
कभी कभी
दिल मॆ बसा कर
 
 

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