धन्य-धन्य
ओ मिथिला महान, हम सब छी जकर संतान ।
विश्व
करैछ जकर गुणगान, धन्य-धन्य ओ मिथिला महान ।।
रामक सासुर छैन जाहि ठाम, कपिल, कणाद, गौतमक स्थान ।
सुर,
नर, मुनि करैछ जकर यशगान, धन्य-धन्य ओ मिथिला महान ।।
सनातन धर्मक जखन भ गेल लोप, नास्तिक सभक सभतरि पसरि गेल कोप ।
तखनहु
मिथिला में छल धर्मक इजोत, सामवेदक मंत्रोच्चार सॅ ओतप्रोत ।।
आदि
शंकराचार्यक अछि इ प्रसंग, शास्त्रार्थ केला मंडन ओ भारतीक संग ।
वैदिक
धर्मक पुन: भेल विस्तार, विश्व देखलक मिथिलाक संस्कार ।।
मैथिल
होएबा पर अछि हमरा अभिमान, अतिथि सत्कार अछि जकर धर्मप्राण ।
सुर,
नर, मुनि करैछ जकर यशगान, धन्य-धन्य ओ मिथिला महान ।। धन्य-धन्य ओ
मिथिला महान ।।।
प्रस्तुती
प्रवीण झा
pkjpatna@gmail.com
प्रवीण
झा, पूर्व मध्य रेल, पटना (भाई लोकनि अपने सब सॅ आग्रह जे मिथिला
लाईवक चैटरूम में आबी आ सप्रेम गप-शप करी ।)
स्वर्ग सॅ सुन्दर मिथिलाधाम
मैथिल भाई हमर प्रणाम
सत्तहवां सावन
कभी कभी
दिल मॆ बसा कर
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