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साहित्‍य सुधा    प्रॊ शिव चन्द्र झा  Shiv.chandra@mithilalive.com   Hit Counter

खुसरो के हृदय का उद्‌गार है साहित्‍य ।
कबीर के दोहों का संसार है साहित्‍य ।।

मीरा के मन की पीर बन गूँजती घर-घर ।
सूर के सागर - सा विस्तार है साहित्‍य ।।

जन-जन के मानस में, बस गई जो गहरे तक ।
तुलसी के 'मानस' का विस्तार है साहित्‍य ।।

दादू और रैदास ने गाया है झूमकर ।
छू गई है मन के सभी तार है साहित्‍य।।

'सत्यार्थप्रकाश' बन अँधेरा मिटा दिया ।
टंकारा के दयानन्द की टंकार है साहित्‍य ।।

गाँधी की वाणी बन भारत जगा दिया ।
आज़ादी के गीतों की ललकार है साहित्‍य ।।

'कामायनी' का 'उर्वशी’ का रूप है इसमें ।
'आँसू’ की करुण, सहज जलधार है साहित्‍य ।।

प्रसाद ने हिमाद्रि से ऊँचा उठा दिया।
निराला की वीणा वादिनी झंकार है साहित्‍य।।

पीड़ित की पीर घुलकर यह 'गोदान' बन गई ।
भारत का है गौरव, श्रृंगार है साहित्‍य ।।

'मधुशाला' की मधुरता है इसमें घुली हुई ।
दिनकर के 'द्वापर' की हुंकार है साहित्‍य ।।

भारत को समझना है तो जानिए इसको ।
दुनिया भर में पा रही विस्तार है साहित्‍य ।।

सबके दिलों को जोड़ने का काम कर रही ।
हम सबका का स्वाभिमान है, आधार है साहित्‍य ।।

 

 
प्रॊ शिव चन्द्र झा  Shiv.chandra@mithilalive.com
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