खाउ मैथिली,पियू मैथिली,
हम त' कहै छी -
सरिखन जियू मैथिली;
किछु कहबैक हुवै,
जे किछु लिखबैक हुवै,
धरि म'न के सुनू-
मैथिली के चुनू।
अपन मैथिली,ई सरस मैथिली,
एकरा अपन अंतःकरण में राखू।
पढू मैथिली,लिखू मैथिली,
जे नइ आबैत हुवै
त' सिखू मैथिली,,,
सरिखन जियू मैथिली।
मिथिला के नौनिहाल छी हम
काइल के लेल तैयार छी हम!
जे आइब रहल अछि
प्रखर-पुँज
ओइ नव युग के
आधार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!
हम छी भविष्य अइ मिथिला के,
छी नौनिहाल अइ धरती के;
जे ताइक रहल अछि
घुइर-घुइर,
ओइ स्वर्णयुग के
आसार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!
विपदा अनेक अइ धरती पर
अछि आइ मचेने त्राहि-त्राहि;
फइला जे रहल अछि
अनहार सघन,
ओइ दानव के
संहार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!
अपावन भेल इ जानकी-ग्राम,
घट-घट पर रावण बइसल अछि;
जे नइ हुअक चाही
अइ धरती पर
ओइ अनीति के
प्रतिकार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!
ध्वस्त करु अइ जर्जर के,
किछु नूतन आऊ स्रिजन करी;
जे अछि वरेण्य
अइ मिथिला लै,
ओइ क्रान्ति के
विस्तार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!)
मिथिला मिलन स्थल