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प्रेम रहस्‍य  -

 बिना र्शत के साथ निभाए
ऐसा कोई मिल जाए ।
बिना सुरों के सुर को सजाए
ऐसा कोई फन मिल जाए ।

न कोई रंग हो न कोई ढंग ही
सादगी अनोखा मिल जाए ।
स्वयं ही मेरे साथ में आए
कोई रंग न रह जाए ।

अपने लबों से कुछ न कहे जो
बस मन की आखों से बात करे ।
इस निरंकार संसार निहारे
पूर्ण ब्रम्ह वो बन जाए ।

इसी खोज में रहा सभी तो
समझ न पाता चाहत को ।
इसीलिए तो भटक रहा सब
इस दर से उस दर तक को ।

तुम भी यदि इसी खोज में
दिनरात बिताती रहती हो ।
तो आकर अब हमसे मिल लो
यह जीवन र्स्वग बनाने को ।

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 Arun Jha info@mithilalive.com
 
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