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हमर आशानन्‍द भाई  -  प्रवीण झा,
हमर आशानन्‍द भाई, कमौआ ससुर  के एकलौता जमाई
मास में पन्‍द्रह दिन सासुरे में डेरा ।
पबै छथि काजू-किशमिश, बर्फी-पेड़ा ।।
भोजन में लगैत छनि बेस सचार ।
तरूआ, तिलकोर आ चटनी-अचार ।।
जेबी त गर्म रहबे करतैन, भेटैत रहै छनि गोरलगाई ।
 हमर आशानन्‍द भाई, कमौआ ससुर  के एकलौता जमाई
 
ससुर करैत छथिन ठीकेदारी ।
 घटकैती में छला अनारी ।।
 जखन गेला ओ घटकैती में ।
फँसि गेला बेचारे ठकैती में ।।
आशानन्‍दक पिता कहलखिन- " सुनू औ मिस्‍टर !
हमर बेटा अछि " मैनेजिंग डाइरेक्‍टर"
के करत गाम में हमर बेटाक परतर ।
के लेत इलाका में हमरा बेटा सॅ टक्‍क्‍र ।।
तनख्‍वाह छैक आठ अंक में ।
कतेको लॉकर छैक " स्विस बैंक" में ।।
कतेको लोक एला आ गेला, कियो ने छला लोक सुयोग्‍य ।
" बालक" देबैन हम ओही सज्‍जन के, जे कियो हेता हमरा योग्‍य ।।
बीस लाख त द गेल छल, बूझू जे ओ कथा भ गेल छल ।
मुदा मात्र टाका खातिर बेटा के बेची हम नै छी ओ बाप कसाई"
 हमर आशानन्‍द भाई, कमौआ ससुर  के एकलौता जमाई
 
जोड़-तोड़ भेल, इ कथा पटि गेल ।
लगले विवाहक कार्ड बॅटि गेल ।।
दहेज भेटलनि लाख एगारह ।
आ आशानन्‍द भाईक पौ बारह ।।
शुभ-शुभ के भ गेलै ने विवाह ?
आब कनियॉक बाप होइत रहथु बताह ।
भेल विवाह मोर करबह की ?
आब पॉचों आंगुर सॅ टपकैत अछि घी ।
भले ही कनियॉ छैन कने कारी ।
मुदा विदाई में त भेटलैन " टाटा सफारी " ।।
 
विवाहेक लेल ने छला बाहर में ।
आब नौकरी-चाकरी जाय भाड़ में ।।
आब जहन " बाबा" बले केनाई छनि फौदारी ।
 तखन आब कियाक नै ओ ध लेता घरारी ।।
नै जेता ओ दिल्‍ली फेर, लगलैन हाथ ससुर के कमाई ।
हमर आशानन्‍द भाई, कमौआ ससुर  के एकलौता जमाई
 
बिलास में डूबल छथि आकंठ ।
  सब दिन खेता  रोहुएक "मुरघंट "
कुशल-क्षेम लेल हम पुछलियैन्‍ह- " की आशानन्‍द भाई, ठीक" ?
ताहि पर कहला हमरा जे- " अहॉ के की तकलीफ ?
मुर्गा मोट फँसेलौ हम,
तें ने करै छी आइ बमबम"
कनियॉंक माई कपार पिटै छथि ।
" भाग्‍यक लेख" कहि संतोष करै छथि ।।
" हमर बुचिया के कपार केना एहन भेलै गे दाई"  !  
हमर आशानन्‍द भाई, कमौआ ससुर  के एकलौता जमाई
 
 बहुतो आशानन्‍द छथि एहि आस में।
 कहियो फँसबे करत कन्‍यागत ब्रह़मफॉंस में ।।
कियो कहता जे हम " मार्केटिंग ऑफिसर" ,
कहता कियो हम छी कंपनीक " मैनेजर" ,
तड़क-भड़क द भ्रम फैलौने,
छथि अनेको " लाल नटवर"
ध क आडम्‍बर देने रहु, आशा  क डोर धेने रहु ।
कोनो गरदनि भेटबे करत, अपन चक्‍कू पिजेने रहु ।।
भला करथुन एहन आशानन्‍द सभक जगदम्‍बा माई ।
हमर आशानन्‍द भाई, कमौआ ससुर  के एकलौता जमाई ।।
 
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- प्रस्‍तुति:-    प्रवीण झा



 
 
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