| शादी क्या है
- अरुण कुमार झा |
शादी क्या है एक सौदा है
दो जिश्मों के बीच मॆं
लगती भूख मिटा पाने को
दुनिया शादी करती है ।
प्यार तो होता है ही अंधा
जो अंधे हैं वो करते हैं
आज तो अंधे रहे नहीं अब
वो भी ब्रेल लिपि से पढ़ते हैं ।
फिर आज के युवाओं का क्या कहना
जो गिद्धों की नेत्र लगाए रहते हैं
जो न भी देख सकें उसको भी
ख्वाबों में देखा करते हैं ।
युवतियों का भी क्या कहना
हडिडयाँ छुपाया करती हैं
उभरे हुए वक्ष पिण्डलियाँ दिखा
अपनी पिछवाड़ा मटकाती हैं ।
अपनी रंगीली पोशाकों से
मासूम युवाओं को ललचाती हैं
नग्न निगाह पोशाकों से
दंगा और एड्रस फैलाती हैं।
आखिर युवा भी कब तक सब्र करे
हिरनी को देख शेर कैसे खामोश रहे
पर मासूम शेर को यह न पता
हिरनी के वेश में उसकी शेरनी ही तो है।
प्रस्तुति अरुण कुमार झा
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