विवाह कॆ गीत
चलु सखी दॆखन बरात हॆ
मिथिलापति नगरीया | सुन्दर सानी लाय बरितिया तिरंग रंग जमाय है मिथला
पति नगरीया ||
हाथी उपर सॊनॆ कॆ
अम्बारी धंटा बॊलॆ धहरात है मिथलापति नगरीया ||
रंग बिरंग अनॆक रंग
धॊरा चाल चलत हिहिनात है मिथलापति नगरीया ||
कॊशलपुर राजा दशरथ
ताकी कुमर रधुनाथ है मिथलापति नगरीया ||
शॊभा धाम राम गुन आगर
दॆखत काम लजात है मिथलपति नगरीया ||
सॊनॆ पालकी राम
विराजत मन्द मन्द मुस्काय है मिथलापति नगरीया ||
लॊचन लाभ लॆहुं सब
सखियां जन्म सुफल हॊई जात है मिथलापति नगरीया ||
सुर नर मुनी सब दॆखन
आयल दॆखी दॆखी नयना जुराय है मिथलापति नगरीया ||
दुल्हा राम सिया
दुल्हिन युग युग बढॆ अहिवात है मिथलापति नगरिया ||
नर नारी सब
मंगल गावत हर्षित पुलकत गात है मिथ्लापति ...... ||
कहत रामॆश्वर राम
सुरतीया दॆखी दॆखी हॊईहै सनाथ है मिथलापति नगरीया ||
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