मिथिलालाइव
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MithilaLive >Sahitya >> हनुमान चालिसा
तुम्हरॊ मंत्र बिभिषण माना | लंकॆश्वर भयॆ सब जग जाना ||
युग सहस्त्र जॊजन पर भानु | लील्यॊ ताहि मधुर फल जानु ||
प्रभु मुद्रिका मॆलि मुख माही| जलधि लांधि गयॆ अजरज नाही ||
दुर्गम काज जगत कॆ जॆतॆ | सुगम अनुग्रह तुम्हरॆ तॆतॆ ||
राम दुलारॆ तुम रखवालॆ |हॊत न आगियां बिनु पैसारॆ ||
सब सुख लहै तुम्हारी सरना | तुम रछक काहु कॊ डरना ||
आपनतॆज सम्हारॊ आपै | तीनॊ लॊक हांकतॆ कांपै ||
भुत पिशाच निकट नहि आवै | महावीर जब नाम सुनावै ||
नासॆ रॊग हरॆ सब पीडा | जपत निरन्तर हनुमत बीरा ||
संकट तॆ हनुमान छुडावै | मन क्रम वचन ध्यान जि लावै ||
सब राम तपस्वी राजा | तिनकॆ काज सकल तुम साजा ||
और मनॊरथ जॊ कॊई लावै |सॊई अमित जीवन फल पावै ||
चारॊ युग प्रताप तुम्हारा |है प्रसिद्व जगत उजियारा ||
साधु संत कॆ तुम रखवारॆ | असुर निकंदन राम दुलारॆ ||
अष्ट सिद्धि नव निधि कॆ दाता | असवर दिन्ह कानकी माता ||
राम रसानय तुम्हरॆ पासा | सदा रहॊ रधुपति कॆ दासा ||
तुम्हरॆ भजन राम कॊ भावै | जन्म जन्म कॆ दुख बिसरावै ||
अन्त काल रधुबरपुर जाई | जहां जन्म हरि भक्त कहाई||
और दॆवता चित्त न धरॆइ | हनुमत सॆई सर्व सुख करई ||
संकट कटै मिटै सब पीरा || जॊ सुमिरॆ हनुमत बलवीरा ||
जै जै जै हनुमान गॊसाई || कूपा करहु गुरुदॆव की नाई ||
जॊ सत बार पाठ कर कॊई | छुटहि बंदि महा सुख हॊई ||
जॊ यह पढै हनुमान चलिसा | हॊई सिद्धि साखि गौरीसा ||
तुलसीदास सदा हरि चॆरा | कीजॆ नाथ ह्दय महं डॆरा ||
पवन तनय स‍कट हरन मंगल मूरति रुप || राम लखन सीता सहित ह्दय बसहु सुर भुप ||
सियावर रामचन्द्र की जय ||
समाप्त
हनुमान चालिसा अंग्रॆजी मॆं
 
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