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दीपावली के दिनों की विशेषताओं के बारे में जानकारी


Compsed By Shiv Chandra Jha,  Shiv.chandra@mithilalive.com
 

दिवाली

दिवाली
हिन्दुओं के लिए, दिवाली सिर्फ़ दीप-पर्व नहीं है, बल्कि गणेश-लक्ष्मी, महाबली व महावीर के पूजन-स्मरण का विशेष पर्व भी है।
आधिकारिक नाम दीपावली
अन्य नाम दिवाली, दीवाली
अनुयायी हिन्दू, भारतीय, भारतीय प्रवासी
प्रकार धार्मिक, सामाजिक
उद्देश्य धार्मिक निष्ठा, उत्सव, मनोरंजन
आरम्भ रामायण काल से
तिथि कार्तिक अमावस्या
२००६ तिथि 21 अक्तूबर
२००७ तिथि 9 नवंबर
२००८ तिथि 28 अक्तूबर
अनुष्ठान गणेश-लक्ष्मी पूजन व दीपमाला
उत्सव रौशनी, सजावट, आतिशबाज़ी
समान पर्व छोटी दीवाली या नरक चौदस
दिवाली हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है । दिवाली कार्तिक मास की अमावस्या को मनायी जाती है । अधिकतर यह ग्रिगेरियन कैलन्डर के अनुसार अक्तूबर या नवंबर महीने में पड़ती है ।

दीपावली दीपों का त्योहार है | इसे दीवाली या दीपावली भी कहते हैं । 'दीपावली' संस्कृत का शब्द है इसका अर्थ है दीपकों की अवलि अर्थात्‌ लड़ी । दिवाली अन्धेरे से रोशनी में जाने का प्रतीक है | भारतीयों का विश्वास है कि सत्य की सदा जीत होती है झूठ का नाश होता है | दिवाली यही चरितार्थ करती है - असतो माऽ सद्गमय , तमसो माऽ ज्योतिर्गमय ।

दीप जलाने की प्रथा के पीछे 2 अलग-अलग कारण या कहानियाँ हैं।

श्री राम के रावण को मार कर अयोध्या लौटने की याद में
श्री कृष्ण के नरकासुर को मारने की याद में


यह दो कहानियाँ दुष्टता की नाश का वर्णन करती हैं। पर इन दोनों कहानियों से बिलकुल भिन्न, दिये इसलिये भी जलाये जाते हैं, कि धन की देवी लक्ष्मी को घर के अन्दर आने का रास्ता मालूम हो!
हर प्रांत या क्षेत्र में दिवाली मनाने के कारण एवं तरीके अलग हैं पर सभी जगह कई पीढ़ियों से यह त्योहार चला आ रहा है | लोगों में दीवाली की बहुत उमंग होती है | लोग अपने घरों का कोना-कोना साफ़ करते हैं ; नये कपड़े पहनते हैं । सब मिठाइयों के उपहार एक दूसरे को बाँटते हैं, एक दूसरे से मिलते हैं । घर-घर में सुन्दर रंगोली बनायी जाती है, दिये जलाए जाते हैं और आतिशबाजी की जाती है | बड़े छोटे सभी इस त्योहार में भाग लेते हैं |

यह त्योहार सिक्खों और जैनों के लिये भी महत्वपूर्ण है। जैनों के लिये इसलिए कि इस दिन महावीर जी ने मोक्ष (या निर्वाण) पाया था। और सिक्खों के लिये इसलिए कि दिवाली के दिन ही अमृत्सर में १५७७ में स्वर्ण मन्दिर का शिलान्यास हुआ था। और इसके अलावा १६१९ में दिवाली के दिन सिक्खों के छ्टे गुरु हरगोबिन्द सिंघ जी को जेल से रिहा किया गया था।

यह त्योहार के समय नेपाल का मौलिक संवत नेपाल संवत का नयां वर्ष सुरु होता है।

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