शक्ति
के आराधना के ९ दिन : जय अम्बे जय जगदम्बे माँ :-
शक्ति के आराधना के ९
दिन : जय अम्बे जय जगदम्बे माँ
भारतीय सामाजिक धर्म जीवन मे रिलीजन जैसी कोई बात नही है यहाँ हर व्यक्ति
हर समूह को अपनी परिभाषाओ ओर उपासनाओ को निर्धारित करने की पूर्ण
स्वतंत्रता प्राप्त है वह चाहे किसी भी जाती धर्म समूह का क्यो न हो |
नवरात्र पर्व भी आराधना का पर्व है | नवरात्र पर्व के पूर्व पितृ भूलॉक
मे जल लेने आते है उनके विचरण से अध्यात्मिक वातावरण के कणों मे पवित्र
उर्जा रहती है जो अध्यात्मिक उपलब्धियो मे सहायक सिद्ध होती है | नवरात्र
पर्व शक्ति ओर उर्जा की आराधना का पर्व है | नवरात्र पर्व मे हम स्त्री
रूप मे इश्वर की पूजा आराधना करते है | पश्चिम मे इश्वर को पिता की
अवधारणा के रूप मे स्वीकार किया गया है जबकी हमारे देश मे शक्ति की
अवधारणा माँ के रूप मे की जाती है | शक्ति को विश्व की गतिशीलता का कारण
माना गया है | भारतीय संस्कृति मे यह एक एसा पर्व है जिसमे सृष्टि का हर
कण शामिल है ओर हर कण दुर्गा से परिपूर्ण है | यहाँ दुर्गा शब्द का
वास्तविक अर्थ जिसका पार न पाया जा सके जिसे कोई जीत न सके जिसकी व्याख्या
न की जा सके | शक्ति की इतनी परिष्कृत परिकल्पना पृथ्वी की किसी दूसरी
संस्कृति मे मिलना मुश्किल है | शक्ति माँ की आराधना ९ दिनों तक ९ रुपों
मे की जाती है | पहले दिन शैलपुत्री दूसरे दिन ब्रम्हाचारणी तीसरे दिन
चंद्रघंटा चौथे दिन क्र्षमांडां पांचवे दिन स्कन्दमाता छटवे दिन कात्यायनी
सातवे दिन कालरात्रि अठावे दिन महागौरी ओर नवे दिन सिध्धिदात्री माँ भगवती
की पूजा आराधना की जाती है | पर्व त्यौहार हमारी धार्मिक ही नही
सांस्कृतिक जीवन का एक हिस्सा है इनमे अतीत की एक झांकी होती है वही उस
अंचल की भीनी सुगंध भी समाई होती है | हर दस कोस पर पानी ओर हर दस कोस पर
बानी बदलने वाले हमारे भारत देश मे परंपराओ ओर रीतिरिवाजो मे इतनी ही
विविधता देखने को मिल सकती है | बात चाहे एक ही त्यौहार की क्यो न हो लोक
परंपराओ से सम्रध्ध भूमि पर जब आस्था उतरती है तो तीज पर्व बहुरंगी रूप
धर लेते है | माँ के प्रति आस्था प्रगट करने के देश मे अलग अलग तरीके है
ओर सभी धूमधाम से नवरात्र पर्व को मनाते है | जय माँ अम्बे जगदम्बे माँ
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