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जिमूतवाहन व्रत (
जितीया पावैन ) : - भविष्य पुराणक अनुसार पुत्रक दीर्घायुक
कामनासँ एहि व्रतक विधान कएल गॆल अछि | आसिन कृष्ण अष्ट्मीकॆँ दुनू साँझ
उपवास र्हि प्रात: काल नवमी तिथि मॆं पारणाक विधान अछि |
मिथिला मॆं सधवा लॊकमि एहि व्रतक पूर्व दिनमॆं माँछ मरुआ अवश्य खाइअत छथि
आ विधवा लॊकनि अरबा अरबैन करैत छथि | पुर्वक रातिमॆं अगर अष्टमी नहि पड़ल
रहैत छैक त कौआ डकब स पुर्व ग्राम विधिक अनुसार चुरा दही आ कि पुड़ी पकवान
लअ ऒठड़्न करैत छथि |
जिमूतवाहन पूजा : जितियाक दिन व्रती जाही ठाम स्नान करथि पॊखरि, नदी,
ईनार ईत्यादी, ऒकर प्राड़्नमॆं पूब मुहॆ ठाढ भए तामक अर्घा मॆं अर्घ लअ क
सुर्य भगवान कॆ अर्घ दॆथि | एही मन्त्र स " एषॊर्घ: श्री सुर्यनारायणाय
नम: " | और निम्न मंत्र स संकल्प करथि " नम: अद्य आरभ्य षॊडश वर्षाणि
यावत: प्रतिवर्षिया आशिवन कृष्णाष्टम्यां प्रदॊषै जिमूतवाहन व्रत संकल्प
अहं करिष्यामि | एहि ठाम स व्रत सुरु हॊइत अछी आब व्रत कर्ता अपना मॊन
मुताविक अन्य भगवान कॆ सॆहॊ अपना आँगन मॆं पुजा क सकैत छथी अगर पुजा
नहींयॊ करब त अपना ईष्ट दॆव कॆ अवश्य मौन स प्रणाम क लॆव |
जुमूतवाहन व्रत कॆ महत्व :-
एक दिन कैलाशक अति रमणिय शीखर पर बैसल पार्वती
शंकर भगवान स प्रश्न कॆलखिन एहन कॊन व्रत वा तपस्या छैक जकरा कयलासँ
सौभाग्यवती स्त्रीक सन्तान जीवित रहतैक | शंकर जी कहलखीन जॆ आसीन कृष्ण
अष्टमी तिथी कअ यदि स्त्री लॊकैन पुत्रक आयु कॆ लॆल शलिवाहन राजाक पुत्र
जिमूतवाहनक कुशक प्रतिमा बनाय कलशक जलमॆं स्थापना क अ कलशक चारु भाग
सुगन्धित क अ ऒहिठाम खाधि खुनि पॊखरिक निर्माण क अ एकटा पाकरिक ठाढी रॊपि
ताहि पर गॊबर माटिसँ चिलहॊरिक निर्माण क' ठाढि पर आ गीदरनीक आकृति बनाय
ठाढिक निचामॆं राखि दूनूक माथ पर सिन्दुर लगाय फुल माला अक्षत, धुप, दिप,
नैवैद्य आदि सँ युक्त्भ ' बाँसक पात पर पुजा कयलासँ वंशक वृधी हॊईत छैक |
आ पुत्रक जतैक जॆ ग्रह रहैत अछी ऒकर स मुक्ती भैतैत छैक और सब मनॊरथ
पुर्ण हॊइत छैक |
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