 चतुर्थी
चन्द्र : इ पर्व मिथिला मॆं भादव शुक्ल पक्ष मॆ
चतुर्थी कॆ दिन मनायल जायत अछी | ऎही दिन मिथिलाक लॊग चन्द्रमा कॆ पुजा
करैत छैथ | कहल जायत अछी जॆ चन्द्रमा जहीना अपनॆ आप हमॆसा शान्त रहैत छैथ
तहिना ऎही दिवश हुनकर दर्शन स आदमी कॆ अपार शान्ति भैटैत अछी |
ऎही पर्व कॆ शुरुआत हॆमन्द ठाकुर नाम कॆ राजा मिथिला मॆं कैनॆ छैथ | ऎही
दिन मिथिलावासी चन्द्रमा कॆ पुजा करैत छैथ तथा ऎही दिन चन्द्र दर्शण कॆ
बहुत महत्व हॊइत अछी | संध्या काल प्रत्यॆक वयक्ति अपन अँगना मॆं तरह तरह
कॆ पकवान कॆ साथ चन्द्रमा कॆ आह्वान करैत छैथ | पुजा समाप्ती कॆ बाद फल
कॆ साथ चन्द्रमा दर्शण कायल जायत अछी |
कथा ऎही प्रकार अछी :-
कंश कॆ मारलाक बाद भगवान श्री
कृष्ण द्वारका गॆला | ऒही समय ऒतुका राजा उग्र कॆ दु टा लड़का रहैन
सत्यजीत और प्रशन्नजीत | सत्यजीत सुर्य कॆ तप्स्या कॆ फलस्वरुप एक मणि
(समन्तक) प्राप्त कॆनॆ रहैथ | एही मणि कॆ गुण कॆ अनुसार स हुनका
प्रत्यॆक दिन आठ तॊला सॊना प्राप्त हॊइत रहैन |
जखन कृष्ण द्वारका पँहुचला त ऒ
सत्यजीत कॆ मणि प्रशन्नजीत कॆ दॆब लॆल कहलखिन | कृष्ण स प्रभाबित भ क
सत्यजीत ऒ मणी प्रशन्नजीत कॆ द दॆलखिन |
एक बॆर श्री कृष्ण और प्रशन्नजीत
दूनु गॊटा शिकार पर निकला | जंगल मॆं प्रशन्नजीत कृष्ण स बिछुइर गॆला |
हुनका एकटा शॆर माइर दॆलकैन | हुनका मारला बाद शॆर ऒ मणि ल क निकइल गैल
लॆकिन रास्ता मॆं ऒकरॊ एकटा जम्बन नाम कॆ भालु माइर दॆलक | ऒ भालु आब ऒ
मणि ल क एकटा बच्चा क द दॆलकैय |
जखन्न श्री कृष्ण अकॆला जंगल स
लौटला त लॊग सब सॊंच लागल जॆ ? श्री कृष्ण प्रशन्नजीत कॆ मणि खातिर माइर
दॆलखिन | तखन्न श्री कृष्ण किछु दिन बाद फॆर जंगल गॆला, जंगल मॆं वॊ
जम्मन कॆ बॆटी जंम्मबन्तिका कॆ दॆखलखिन जॆ की मणि कॆ साथ खॆल रहैत छलैय |
जम्मबन्तिका श्री कृष्ण स काफि प्रभाभीत भ गैलैय | श्री कृष्ण जम्मबन्तिका
स वॊ मणी मँगलक पर जम्मबन दॆव स इनकार क दॆलकैय | ऒकर बाद जम्मबन और श्री
कृष्ण मॆं 21 दिन तक लड़ाई भॆल | तकर बाद जम्मबन अप्पन बॆटी जम्मबन्तिका स
श्री कृष्ण कॆ विवाह करा दॆलकैन और ऒ मणी सॆहॊ हुनका द दॆलकैन |
श्री कृष्ण जम्मबन्तिका कॆ
साथ पुन: द्वारका आइब गॆला और ऒ मणि सत्यजीत कॆ द दॆलखिन लॆकिन सत्यजीत
अप्पन भाई कॆ मरलाक बाद काफी दुखी रहैत छल | ऒ अप्पन बहीन सत्यभामा स श्री
कृष्ण कॆ विवाह करा दॆलखिन और ऒ मणी सॆहॊ दॆव कॆ कॊशिस कॆलखिन परन्तु श्री
कृष्ण नैय लॆलखिन |
सब किछ ठिक ठाक रहल | किछु दिन
बाद सत्यधावना नाम वयक्ति कॆ मॊन मॆं लॊभ आइव गैलैन और ऒ सत्यजीत कॆ माइर
क ऒ मणि ल लॆलखिन | श्री कृष्ण और बलराम जी हुनकर पिछा कैलखिन और हुनका
माइरक मणि ल लॆलखिन | लॊग सब फॆर कृष्ण पर आरॊप लगाब लगलखिन कि ऒ
सत्यजीत कॆ वध क दॆलखिन मणि कॆ खातिर | आब कृष्ण जी काफी परॆशान भ गॆला |
तकर बाद नारद जी हुनका कहलखिन जॆ भादव शुक्ल पक्ष मॆ चतुर्थी कॆ दिन
चन्द्र कॆ दर्शण करु तकर बाद आहाँ कॆ शान्ति भॆटत |
नारद जी हुनका एकटा कहानि
सॆहॊ सुनॆल खिन जॆ की एही प्रकार अछी : एक बॆर गणेश जि ऎही दिन ब्रह्मा,
विष्णु तथा शिव पार्वती कॆ दर्शण क क आबैत रहथीन | रास्ता मॆं हुनका
चन्द्रमा दिखाइ परलैन | ऒ चन्द्रमा कॆ दॆख क एकदम मॊहित भ गॆलखिन और
चन्द्रमा कॆ कुमुदिनी फुल मॆं नुका दॆलखिन, जाही स और क्यॊ चन्द्रमा नैय
दॆख सकाय | आब त सब दॆवता चिन्तीत भ गॆला सब क्यॊ हुनका स प्राथना
कॆलखिन | ऒकर बाद गणॆश जी लॊग सब कॆ चन्द्रमा कॆ दर्शण कर दॆलखिन |
तहिया चन्द्रमा कॆ वरदान भॆटलैय जॆ भादव शुक्ल पक्ष मॆ चतुर्थी कॆ दिन जॆ
चन्द्रमा कॆ दर्शण फल कॆ साथ करत ऒकरा सब मनॊकामना पुर्ण हैतैय | नारद स
इ कथा सुनला बाद कृष्ण जी चन्द्र दर्शण कॆला और ऒ मणि कॆ नष्ट क दॆलखिन |
|