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सामा-चकेवा शुरू
 
समस्तीपुर। भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व सामा-चकेवा शनिवार से प्रारंभ हो गया। बहनें आज दोपहर से ही सामा-चकेवा की मूर्ति, सतभइया, वृंदावन, चुगला आदि को बनाने में जुट गयी। संध्या में खुले स्थान पर बहनों का समूह पर्व से जुड़े गीतों को गाकर उत्साह मनाएंगी।

कार्तिक मास की सप्तमी तिथि से शुरू होने वाला यह पर्व पूर्णिमा तक जारी रहेगा। लोक संस्कृति से जुड़े इस पर्व के संबंध में कहा जाता है कि भगवान कृष्ण की बेटी का नाम श्यामा था। उसे जंगल में खेलने का शौक था। इसलिए वह रोज किरण फूटते ही जंगल में खेलने चली जाती थी। यह बात चुगला को रास नहीं आई। और उसने श्यामा के पिता को उल्टा-सीधा बता दिया। इससे उत्तेजित हुए कृष्ण ने उसे चिड़ियां हो जाने का शाप दे दिया और वह चिड़िया बन गयी। इधर, जब भगवान को पुत्र रत्‍‌न की प्राप्ति हुई तो उसे अपनी बहन के बारे में जानकारी मिली। फिर उसने बहन की वापसी के लिए जिद ठान दी। हार कर भगवान कृष्ण ने कहा कार्तिक मास में तुम्हारी बहन आएगी और पूर्णिमा को चली जाएगी। इसके साथ ही इस पर्व की शुरूआत हुई। तभी से यह पर्व भाई-बहन के प्रेम के रूप में लोक पर्व के रूप में मनाया जाता है।
 
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सामा चकॆवा गीत

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